कोरोना वायरस से ठीक हुए लोगों को भी प्रदूषण से परेशानी खड़ी हो गई है। ये छाती में जकड़न, दर्द, सांस फूलना, घबराहट की दिक्कत बता रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन और वक्ष एवं क्षय रोग विभाग में बीते 10 दिन से रोजाना 12 से 15 मरीज आ रहे हैं।
एसएन के वक्ष रोग विभाग के डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि खासतौर से दूसरी लहर में संक्रमित हुए लोगों में यह परेशानी मिल रही है। धूल-धुआं और ब्लैक कार्बन तत्व फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं। इनका एक्सरे और एचआरसीटी कराने पर फेफड़ों और हृदय की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इससे इनमें सूजन की परेशानी मिली। मरीजों से पता चला कि अप्रैल-मई में यह संक्रमित होने पर ऑक्सीजन या फिर आईसीयू में रहे। वायरस से फेफड़ों में 40 से 60 फीसदी तक संक्रमण रहा। इनको दवाएं देने के साथ सांस की व्यायाम और प्रदूषण से बचाव के बारे में सलाह दे रहे हैं।
प्रदूषण कम होने पर सामान्य हो जाएगी हालत
मेडिसिन विभाग के डॉ. टीपी सिंह ने बताया कि हवा में मौजूद धूल-धुआं के 2.5 पीएम आकार के अतिसूक्ष्म कण सांस नली में पहुंच कर फेफड़े की अंतिम इकाई तक पहुंच जाते हैं, इससे नलिकाएं सूजन आने से संकुचित होने लगती हैं। इससे फेफड़े और हृदय तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचती, इससे मरीज की सांस उखड़ रही है। पोस्ट कोविड मरीजों को दवाएं देने के साथ सांस की व्यायाम की सलाह दे रहे हैं। प्रदूषण कम होने पर परेशानी भी नहीं होगी।
इन्हेलर की ले रहे थे गलत डोज, हो रही थी परेशानी
एसएन के वक्ष रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि सीओपीडी दिवस पर लगाए गए शिविर में 253 मरीजों की सांस की जांच हुई। इनमें से 136 मरीजों इन्हेलर की डोज सही तरीके से नहीं ले रहे थे। इससे इनकी मर्ज में आराम ज्यादा नहीं मिल रहा था। इनको डोज लेने की सही जानकारी दी गई। 18 मरीजों में प्रदूषण के चलते सांस की परेशानी मिली। बाकी के मरीज धूम्रपान और घर में धुआं समेत अन्य प्रदूषण के चलते सांस की परेशानी बनी। शिविर में डॉ. अचल सिंह, डॉ. आमिर, डॉ. विपिन कुमार, डॉ. राकेश सिंह, डॉ. आरिफ, डॉ. कृष्णकांत, डॉ. कोंपा ने भी मरीज देखे।
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