- 356 एमएलडी सीवेज निकल रहा आगरा में
- 220 एमएलडी की है एसटीपी की क्षमता
- 140 एमएलडी का ही हो रहा है शोधन
- 216 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट बिना यमुना में गिर रहा
- 61% सीवेज यमुना में गिरकर बढ़ा रहा प्रदूषण
यमुना नदी में ट्रीटमेंट के बिना ही सीवर और नालों का गंदा पानी छोड़ने पर जल निगम को भारी जुर्माना चुकाना पड़ेगा। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जल निगम की यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई को एनजीटी के आदेश पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के लिए नोटिस जारी किया है। अभी जुर्माने की राशि का आकलन किया जा रहा है। जल निगम पर एसटीपी संचालन में ढिलाई बरतने पर हाल में ही साढ़े सात करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा आगरा की सीवर समस्या पर स्वत: संज्ञान लेकर नीरी के वैज्ञानिक डा. एसके गोयल और पर्यावरणविद एमसी मेहता के दो दिन तक आगरा में सीवर नेटवर्क देखने के बाद जल निगम की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।
नगर निगम क्षेत्र में 61 नालों के जरिए हर दिन 216 एमएलडी सीवर यमुना में पहुंच रहा है। शहर से निकलने वाले सीवर का हर दिन 61 फीसदी सीवर ट्रीटमेंट के बिना यमुना में गिर रहा है। नालों को टैप करने की जिम्मेदारी जल निगम की है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए आदेश के बाद जल निगम पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई शुरू की है। जल निगम को पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क देने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
क्षमता 220 की, ट्रीटमेंट 140 एमएलडी का
जल निगम की यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने धांधूपुरा, नगला बूढ़ी, भैंरो नाला, मंटोला में गिर रहे सीवेज के ट्रीटमेंट के लिए 220 एमएलडी क्षमता के एसटीपी लगाए हैं, लेकिन इनमें केवल 140 एमएलडी सीवेज ही ट्रीट किया जा रहा है।
एसटीपी के जरिए भी 80 एमएलडी सीधे बाईपास होकर यमुना में पहुंच रहा है। मंटोला नाले पर रामलीला मैदान से 78 एमएलडी सीवेज ओवरफ्लो होकर कारीडोर के जरिए यमुना में गिर रहा है। यही हाल भैंरो नाला का है।
इन 8 नालों से यमुना हो रही जहरीली
- ताज पूर्वी गेट
- मंटोला नाला
- वाटर वर्क्स नाला
- नरायच नाला
- भैंरो नाला
- नगला बूढ़ी
- अनुराग नगर
- पीलाखार ड्रेन
एनजीटी के आदेश पर जल निगम पर एसटीपी संचालन में लापरवाही पर जुर्माना लगाया जा चुका है। अब नालों को टैप न करने पर यह कार्रवाई की जा रही है। जल निगम को प्रदूषण फैलाने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क देना पड़ेगा। -भुवन प्रकाश यादव, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी