कोहरे के कारण नजर नहीं आया ताजमहल का गुंबद
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साल 2017 में दिसंबर के महीने में सबसे ज्यादा जहरीली हवा रही, जिसने आगरा के लोगों के फेंफड़ों तक प्रदूषित तत्व पहुंचाए, वहीं कई लोगों को अस्थमा, गले और आंखों की बीमारियां दी।
दिसंबर में एक भी दिन ताजनगरी के लोगों को स्वच्छ हवा नसीब न हो सकी। दिसंबर के 15 दिन तो स्मॉग बेहद खतरनाक स्तर पर रहा, जबकि 16 दिन हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्तर पर रही।
ताज ट्रिपेजियम जोन अथारिटी ने कागजों पर एक्शन प्लान खूब बनाए हैं, लेकिन आगरा को जहरीली हवा से मुक्त करना तो दूर, कोई कमी तक नहीं ला सकी। दिसंबर के महीने में तो प्रदूषण ने रिकार्ड तोड़ दिए।
महीने में 15 दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से 500 के बीच पहुंचा, जबकि 16 दिन यह 300 से 400 के बीच रहा। प्रदूषण में सबसे ज्यादा मात्रा खतरनाक पीएम 2.5 कणों की रही, जो 500 के पार पहुंच गई। यह सामान्य से 8 गुना तक ज्यादा है, वहीं कार्बन मोनोक्साइड की मात्रा भी 50 से 80 गुना तक ज्यादा पाई गई।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में पर्यावरण मामलों में याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने ताज ट्रिपेजियम जोन अथारिटी पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सूचना के अधिकार में आगरा की वायु गुणवत्ता का ब्यौरा लिया है, जिस पर वह जल्द ही दिल्ली की तर्ज पर स्वच्छ हवा के लिए कदम उठाने को एनजीटी से गुहार लगाएंगे।
देश का पांचवां प्रदूषित शहर
सोमवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रविवार-सोमवार के प्रदूषण का एयर क्वालिटी इंडेक्स जारी किया, जिसमें आगरा देश का पांचवां प्रदूषित शहर रहा।
गाजियाबाद 434 सूचकांक के साथ पहले नंबर पर, लखनऊ 386 के साथ दूसरे नंबर पर, मुजफ्फरपुर 359 अंक के साथ तीसरे नंबर पर, पटना 357 के साथ चौथे स्थान पर रहा।