फूल, फसलों और घास के परागकण हवा के साथ सांस की नलिकाओं में पहुंचकर एलर्जी और अस्थमा की समस्या बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 10-12 फीसदी मरीजों में परागकण से परेशानी सामने आ रही है और बच्चों में भी मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
फूल, फसलों और घास के परागकणों से लोगों को अस्थमा और एलर्जी हो रही है। 12 फीसदी मरीजों में यह वजह मिल रही है। आवास विकास कॉलोनी स्थित होटल में एकेडमी ऑफ मेडिकल स्पेशियलिटीज आईएमए की कार्यशाला में रोल ऑफ पॉलन रेस्पायरेटरी एलर्जी एंड दीयर ट्रीटमेंट विषय पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए।
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मुख्य वक्ता एसएन मेडिकल कॉलेज की डॉ. कोमल लोहचब ने बताया कि फसल, फूल और कई तरह की घास पर परागकण आते हैं। ये हवा के जरिये सांस नलिकाओं में पहुंचकर संक्रमित करते हैं। इससे सांस लेने में परेशानी, एलर्जी होने लगती है। खासतौर से फरवरी-मार्च में ये समस्या अधिक होती है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि परागकणों से 10-12 फीसदी मरीजों में इस तरह की दिक्कत आती है। इसमें बच्चों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। एसएन के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव और हवा में परागकणों की संख्या अधिक होने के कारण ये दिक्कत मिल रही है। इसमें एलर्जी की जांच कराने के बाद इलाज दिया जाता है। कार्यक्रम में आईएमए के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. हरेंद्र गुप्ता, डॉ. एएस सचान, डॉ. राजेश गुप्ता, डॉ. संजीव आनंद, डॉ. अनुपम गुप्ता, डॉ. सौम्यता नीरज, डॉ. योगिता वत्स आदि मौजूद रहे।