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इंस्पेक्टर संग पकड़ी गईं महिला थाना प्रभारी: जांच में मिले होश उड़ाने वाले साक्ष्य, यूं ही नहीं पहुंची पत्नी

Tue, 06 Aug 2024 08:12 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

उत्तर प्रदेश के आगरा में थाना रकाबगंज के पीछे सरकारी आवास में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक शैली राणा और पवन कुमार की पिटाई के मामले में एसीपी सदर डॉ. सुकन्या शर्मा की जांच में कई जानकारी सामने आई हैं।
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युवक के घरवालों ने उसे महिला इंस्पेक्टर के आवास में रंगे हाथ पकड़ा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के आगरा में थाना रकाबगंज के पीछे सरकारी आवास में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक शैली राणा और पवन कुमार की पिटाई के मामले में एसीपी सदर डॉ. सुकन्या शर्मा की जांच में कई जानकारी सामने आई हैं। सूत्रों ने बताया कि पवन कुमार की पत्नी गीता यूं ही नहीं आ गई थीं। उन्हें साजिश के तहत फोन करके बुलाया गया था।
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इसके बाद सरकारी आवास तक ले जाया गया। इस पूरे प्रकरण में थाने के ही पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आ रही है। पुख्ता साक्ष्य मिलने पर अधिकारियों को रिपोर्ट दी जाएगी। आरोपी पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ मुकदमे में भी आरोपी बनाए जा सकते हैं।
 

थाना रकाबगंज की प्रभारी निरीक्षक शैली राणा के सरकारी आवास पर शनिवार को विजिलेंस के इंस्पेक्टर पवन कुमार की पत्नी गीता, साले ज्वाला, सोनिका, भतीजे दिग्विजय ने धावा बोला था। शैली राणा और पवन कुमार की पिटाई की थी। काफी देर तक हंगामा हुआ था। 
 

घटना की जानकारी पर मीडियाकर्मी भी पहुंचे थे। पुलिसकर्मियों के साथ अन्य ने भी वीडियो बनाए। यह वायरल हो गए थे। बवाल होता रहा और थाने के पुलिसकर्मी मूकदर्शक बनकर देखते रहे थे। मामले में दो दरोगा, तीन मुख्य आरक्षी, तीन सिपाही पर कार्रवाई हुई थी।
 

मुख्य आरक्षी हरिकेश और विशाल को निलंबित किया गया था। बाकी लाइन में भेजे गए थे। गीता, ज्वाला और सोनिका को घर में घुसकर मारपीट, गालीगलौज, जान से मारने की धमकी, बलवा में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मामले की जांच एसीपी सदर कर रही हैं।
 

दो से तीन पुलिसकर्मी हो सकते हैं शामिल

सूत्रों के मुताबिक, जांच में पता चला है कि इंस्पेक्टर शैली राणा की थाने के कुछ पुलिसकर्मियों से अनबन चल रही थी। शुक्रवार को उनकी एक मुंशी से तकरार भी हुई थी। इसके अगले दिन ही शनिवार को पवन कुमार की पत्नी गीता परिवार के लोगों के साथ आई थीं। इंस्पेक्टर का आवास काफी दूर था। वह सीधे आवास पर पहुंच गई थीं। 

जांच में सामने आया है कि थाने के दो से तीन पुलिसकर्मी साजिश में शामिल थे। उन्होंने फोन करके आगरा बुलाया था। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने ही आवास का रास्ता बताया। परिजन सीधे गए या फिर थाने भी आए थे, इसका पता करने के लिए थाने के सीसीटीवी फुटेज भी देखे जा रहे हैं। जांच अधिकारी के रडार पर जो पुलिसकर्मी हैं, उनकी कॉल डिटेल भी चेक की जा रही है।
 

गुटबाजी की वजह से नहीं करने आए बचाव

अमूमन किसी घटना पर पहुंचने पर पुलिस झगड़े को शांत कर देती है। मगर, इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। अपने ही थाने की इंस्पेक्टर की पिटाई होती रही और थाने के पुलिसकर्मी मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते रहे। कार्रवाई भले ही कर दी गई? मगर, अधिकारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि ऐसा व्यवहार क्यों किया गया? 
 

जांच में सामने आया कि थाने में गुटबाजी हावी है। इंस्पेक्टर से खफा पुलिसकर्मियों ने अपना गुट बना रखा था। यही वजह थी कि जब वो मौके पर पहुंचे तो सिर्फ तमाशा देखते रहे। मोबाइल से वीडियो भी बनाया। मीडियाकर्मियों को भी फोन करके बुलाया गया। वीडियो वायरल भी हुए। पूर्व में कुछ पुलिसकर्मियों को हटाया भी गया था।
 

मीडियाकर्मियों के नाम मुकदमे में बढ़ाए

इंस्पेक्टर के घर पर बलवा हुआ। मीडियाकर्मी कवरेज करने पहुंचे। इस दौरान बवालियों के साथ इंस्पेक्टर के कमरे में भी घुस गए। इंस्पेक्टर शैली राणा ने बयान दिया कि वह मीडियाकर्मियों को रोक रही थी। वह कमरे में अंदर दाखिल हो गए। इस आधार पर मुकदमे में दो मीडियाकर्मियों को भी आरोपी बनाया गया है।
 

उन्हें साजिश में शामिल होना दर्शाया गया, जबकि जिन पुलिसकर्मियों के नाम प्रकाश में आ रहे हैं। उनके नाम अब तक नहीं बढ़े हैं। आरोपियों के संपर्क में पुलिसकर्मी भी थे। अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्य मिलने पर कार्रवाई होगी। मुकदमे में आरोपी बनाकर जेल भेजा जाएगा।
 
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केस में जांच चल रही है। पुलिसकर्मियों की संलिप्तता की बात भी सामने आ रही है। हालांकि अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। तीन आरोपियों को जेल भेजा गया है। बाकी की तलाश की जा रही है। वादी इंस्पेक्टर के बयान लिए गए हैं। आरोपियों को साजिश के तहत बुलाने के साक्ष्य मिले हैं। मामले में जल्द रिपोर्ट दी जाएगी। -डॉ. सुकन्या शर्मा, एसीपी सदर
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