फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Agra News: दुबई में रह रहे युवक से पुलिस को शांतिभंग का खतरा, भेजा नोटिस; लिखा-आपराधिक प्रवृत्ति का आपका भाई

Tue, 30 May 2023 10:58 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

आगरा में पुलिस को दुबई में रह रहे युवक से शांतिभंग का खतरा है। उसके घर नोटिस भेज दिया। लिखा कि आपका भाई आपराधिक प्रवृत्ति का है।
विज्ञापन
थाना सदर बाजार - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश के आगरा में सदर थाना पुलिस ने दुबई में रह रहे युवक को 110 जी (लोक परिशांति भंग करने का खतरा) में पाबंद करने की रिपोर्ट भेज दी। इस पर एसीपी छत्ता ने नोटिस जारी कर दिया। जमानतदार प्रस्तुत करने को कहा। पीड़ित परिजन ने मंगलवार को पुलिस उपायुक्त नगर को प्रार्थना पत्र दिया। पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। मामले में जांच के आदेश किए गए हैं।

नोटिस में लिखा-भाई आपराधिक प्रवृत्ति का है

हिमाचल कॉलोनी, देवरी रोड निवासी शैलेंद्र सिंह उर्फ शैली जाट दुबई में नौकरी करते हैं। वह दो अप्रैल 2023 से दुबई में रह रहे हैं। भाई गजेंद्र सिंह वार्ड नंबर 5 से पूर्व पार्षद हैं। वह मंगलवार को कमिश्नर ऑफिस पहुंचे। बताया कि पिछले दिनों उनके घर पर एसीपी छत्ता का नोटिस पहुंचा। इसमें लिखा था कि भाई शैलेंद्र सिंह आपराधिक प्रवृत्ति का है। लोगों में भय है। वह किसी भी समय अप्रिय घटना कर सकता है।

विज्ञापन


यह भी पढ़ेंः- जीजा पर आया महिला का दिल: अवैध संबंधों में बाधक बना पति तो मिलकर मार डाला, बेटे का शव देख

एसीपी छत्ता की कोर्ट ने किया पाबंद

थाना प्रभारी शैलेंद्र को 110 जी में पाबंद करने की रिपोर्ट भेजी थी। इस पर एसीपी छत्ता की कोर्ट ने शैलेंद्र को पाबंद कर दिया। उन्हें दो जमानतदार पेश करने के लिए कहा है। गजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि भाई दुबई में रह रहा है। बिना जांच के ही भाई को पाबंद कर दिया गया। मामले में डीसीपी सिटी विकास कुमार को शिकायतीपत्र दिया। उन्होंने जांच के आदेश किए हैं।

विज्ञापन

पुराने मुकदमे के आधार पर की कार्रवाई

गजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में थाना सदर में एक मुकदमा लिखा गया था। इसमें जानलेवा हमला और एससी-एसटी एक्ट लगा था। तब भी मुकदमे में रंजिशन शैलेंद्र को भी नामजद कर दिया गया। तीन अन्य आरोपी भी थे। उस समय भाई दूसरे प्रदेश में नौकरी कर रहा था। इसके साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध कराए थे। वह निर्दोष था। साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे से शैलेंद्र का नाम निकाला गया। अब पुलिस ने इसी मुकदमे के आधार पर भाई के खिलाफ 110 जी की कार्रवाई की है, जबकि उसका नाम मुकदमे से निकल चुका है।
 

सवाल : क्या रजिस्टर तक नहीं देख रही पुलिस?

पुलिस की इस कार्रवाई से सवाल खड़े हो रहे हैं। 110 जी की कार्रवाई आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति के खिलाफ की जाती है। इसकी रिपोर्ट थाने से भेजी जाती है। पूर्व में दर्ज मुकदमों और कार्रवाई का हवाला दिया जाता है। पाबंद होने पर छह महीने तक थाने में हाजिरी देनी होती है। दो जमानतदार भी प्रस्तुत करने होते हैं। इस अवधि में नोटिस वाला व्यक्ति कोई घटना करता है तो जमानत राशि वसूल की जाती है। मगर, कई बार पुलिस बिना रजिस्टर देखे और पड़ताल किए कार्रवाई कर देती है। इस पर लोग शिकायत करते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें