पुराने मुकदमे के आधार पर की कार्रवाई
गजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में थाना सदर में एक मुकदमा लिखा गया था। इसमें जानलेवा हमला और एससी-एसटी एक्ट लगा था। तब भी मुकदमे में रंजिशन शैलेंद्र को भी नामजद कर दिया गया। तीन अन्य आरोपी भी थे। उस समय भाई दूसरे प्रदेश में नौकरी कर रहा था। इसके साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध कराए थे। वह निर्दोष था। साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे से शैलेंद्र का नाम निकाला गया। अब पुलिस ने इसी मुकदमे के आधार पर भाई के खिलाफ 110 जी की कार्रवाई की है, जबकि उसका नाम मुकदमे से निकल चुका है।
सवाल : क्या रजिस्टर तक नहीं देख रही पुलिस?
पुलिस की इस कार्रवाई से सवाल खड़े हो रहे हैं। 110 जी की कार्रवाई आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति के खिलाफ की जाती है। इसकी रिपोर्ट थाने से भेजी जाती है। पूर्व में दर्ज मुकदमों और कार्रवाई का हवाला दिया जाता है। पाबंद होने पर छह महीने तक थाने में हाजिरी देनी होती है। दो जमानतदार भी प्रस्तुत करने होते हैं। इस अवधि में नोटिस वाला व्यक्ति कोई घटना करता है तो जमानत राशि वसूल की जाती है। मगर, कई बार पुलिस बिना रजिस्टर देखे और पड़ताल किए कार्रवाई कर देती है। इस पर लोग शिकायत करते हैं।