आगरा में चरस रखने के आरोप में जेल भेजे गए रुनकता निवासी चांद को अदालत ने बरी किया। इसके साथ ही पुलिस की करतूत से भी पर्दा उठ गया। चांद को पुलिस ने फंसाया था। जिस दरोगा ने केस दर्ज किया और फिर जिसने विवेचना की, कोर्ट की गवाही में उनके कारनामे की पोल खुल गई। अदालत ने दोनों दरोगाओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीजीपी को खत लिखा है।
लिखापढ़ी इस तरह से की गई थी कि थाना सिकंदरा के दरोगा सुधीर कुमार ने 20 अक्तूबर 2016 को मुखबिर की सूचना पर आगरा-मथुरा रोड पर पंजाब नेशनल बैंक के पास चांद निवासी व्यापारी मोहल्ला, रुनकता को पकड़ा था। दरोगा ने दावा किया था कि चांद के पास से 465 ग्राम चरस बरामद की है। इस पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा था।
कोर्ट ने माना कि सुधीर कुमार की भूमिका संदिग्ध है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस घटनाक्रम की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। आरोपी को अनुचित लाभ देने के लिए प्रतिकूल बयान दिया है। इसी प्रकार एसआई राजेश पाल की भूमिका भी संदिग्ध है।
अपर जिला जज अतुल सिंह केस के वादी सुधीर कुमार (हाल तैनात मैनपुरी) और विवेचक एसआई राजेश पाल (हाल तैनात आगरा) के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीजीपी को आदेश दिया है। उधर, चरस रखने के आरोपी चांद को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।