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UP: जिसे कोर्ट में बताया मुर्दा, वो 12 साल बाद स्कूटर चलाते हुए दिखा; एफआईआर दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस

Sun, 01 Mar 2026 12:41 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

आरोपी ने फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के सहारे खुद को कागजों में मृत साबित कर दिया। वादी ने 12 साल बाद आरोपी को स्कूटर चलाते देखा तो होश उड़ गए। मामले में कोर्ट ने एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के थाना न्यू आगरा क्षेत्र के एक आरोपी ने फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के सहारे खुद को कागज पर मृतक साबित कर दिया। पुलिस की मदद से कोर्ट में आख्या भी लगवा दी। वाद को बंद करवा लिया। आरोपी 12 साल बाद स्कूटर चलाते दिखा तो वादी ने अदालत में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। इस पर सीजेएम मृत्युंजय श्रीवास्तव ने थानाध्यक्ष न्यू आगरा को प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं।
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थाना सिकंदरा क्षेत्र के रूबी टावर गणपति क्लासिक निवासी राजकुमार ने अदालत में अधिवक्ता के माध्यम से प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था। आरोप लगाया था कि तत्कालीन विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में राजकुमार वर्मा बनाम विद्या देवी आदि के बीच कूटरचित दस्तावेज के आरोप में मुकदमा लंबित था।

आरोपी विद्या देवी, चुन्नी लाल गोयल और रोशन लाल वर्मा की मौत हो गई। कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी। आरोपी ताराचंद्र शर्मा (निवासी गांधी नगर) के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने वर्ष 2013 में कोर्ट में थाना न्यू आगरा में तैनात पुलिसकर्मियों की मदद से गिरीश चंद शर्मा की ओर से लिखा एक फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर आख्या लगवा दी। जिसमें 1998 में उसे मृत दर्शाया गया था। कोर्ट ने दस्तावेज और पुलिस आख्या को सही मानते हुए 20 सितंबर, 2013 को आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई बंद कर दी थी। आरोपी वर्तमान में थाना हरीपर्वत क्षेत्र के गांधीनगर में नगला बेनी प्रसाद में रह रहा था। 
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