आगरा के थाना मलपुरा क्षेत्र के गांव लालऊ निवासी छात्रा संजलि को जिंदा जला दिए जाने की घटना की जांच में पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। पुलिस इस मामले में अब तक हमलावरों की गिरफ्तारी तो दूर उनके बारे में कोई सुराग तक नहीं जुटा पाई है। इस वजह से हर तरफ पुलिस की किरकिरी हो रही है। इस बीच शनिवार को पुलिस घटनास्थल पर उस बस ड्राइवर के साथ पहुंची, जिसने संजलि के शरीर पर लगी आग को बुझाने की कोशिश की थी।
पुलिस दल ने आज क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्ट करने की कोशिश की। इस दौरान स्प्रिंगडेल पब्लिक स्कूल के बस ड्राइवर मुकेश ने पूरी वारदात के बारे में पुलिस को बताया। मुकेश ने बताया कि जब वह लालऊ गांव से बच्चों को छोड़कर यहां पहुंचा तो उनसे आग की लंबी-लंबी लपटें देखीं। वह फौरन संजलि के पास पहुंचा और बस में रखे आग बुझाने वाले सिलेंडर से उसकी आग बुझाई।
मुकेश से जब पूछा गया कि क्या उसने किसी को घटना के वक्त देखा तो उसने कहा कि नहीं जब मैं यहां पहुंचा तो कोई भी शख्स यहां मौजूद नहीं था। पीड़ित बच्ची मदद की अपील कर रही थी और बार-बार बचाने को कह रही थी।
पुलिस को मौका-ए-वारदात से कुछ जले हुए कागज मिले हैं। बता दें कि इससे पहले पुलिस के हाथ एक लाइटर लगा था, जिसे लेकर आशंका जताई जा रही थी कि हो सकता है संजलि को इससे ही जलाया गया हो।
पुलिस यह मालूम कर रही है कि इस तरह का लाइटर जनपद में कहां बिकता है? और हाल फिलहाल में कौन-कौन खरीदकर लाया? उम्मीद है कि इन सवालों के जवाब से ही कोई न कोई सुराग मिल जाएगा।
इस बीच संजलि हत्याकांड के बाद गांव लालऊ में दहशत का माहौल है। घटना से सहमे ग्रामीणों ने बड़ा फैसला किया है। उन्होंने कहा कि पहले संजलि के हत्यारे गिरफ्तार किए जाएंगे, इसके बाद ही हम बेटियों को स्कूल भेजेंगे।
लालऊ गांव के 100 से अधिक परिवारों ने शुक्रवार को कहा कि अगर पुलिस हत्यारों का पता लगाकर उन्हें नहीं पकड़ पाती है, तो हमारी बेटियां घर पर ही बैठी रहेंगी। आखिर उन्हें भेजें भी तो किस भरोसे, जैसे संजलि को जलाया वैसे ही हमारी बेटी को भी जला दिया तो कौन जिम्मेदार होगा? आखिर हत्यारे अभी खुले जो घूम रहे हैं।