पुलिसकर्मी का हत्यारोपी पकड़ा।
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आगरा के खेरागढ़ में पुलिसकर्मियों को गोली मारकर राइफल लूटने के आरोपी भूरा को पुलिस सोमवार को रिमांड पर ले सकती है। इसके लिए न्यायालय के समक्ष प्रार्थनापत्र दिया जा चुका है। रिमांड मिलने पर पुलिस घटना से संबंधित सवालों के जवाब आरोपी से लेने का प्रयास करेगी। डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार ने बताया कि पुलिस की लिस्ट में अभी अन्य मामलों में और कई वांछित हैं।
31 दिसंबर 1998 की रात थाना खेरागढ़ के नगला कमाल चौराहा से उटंगन नदी की ओर सिपाही कमल सिंह, चरन सिंह और उमेश चंद्र गश्त कर रहे थे। उस समय तीनों सिपाही से कुख्यात लुटेरे रमेश कुशवाह गैंग के सदस्यों ने दो राइफल और एक एसएलआर बंदूक लूट ली थी। बदमाशों के गोली मारने से सिपाही कमल सिंह की मौत हो गई थी, जबकि सिपाही चरन सिंह घायल हुआ था। इस घटना के 10 दिन बाद पुलिस ने रमेश कुशवाह को मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके बाद गैंग के एक और सदस्य नरेंद्र भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। पुलिस ने दो राइफल बरामद कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जबकि गैंग का एक सदस्य भूरा उस समय से अंडरग्राउंड हो गया था।
डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार ने बताया कि पुलिस वांछित अपराधियों की तलाश के लिए अभियान चला रही थी। इसी दौरान पुलिस को भूरा के जिंदा होने का सुराग मिला। थाना पुलिस, एसओजी और सर्विलांस की टीम ने संयुक्त रूप से कार्य किया और शुक्रवार को आरोपी भूरा को आरसीसी मिक्सर प्लांट, सिहोर रोड, बिलविसगंज, भोपाल से गिरफ्तार किया गया। आरोपी भोपाल में नाम बदलकर अपनी पत्नी के साथ रह रहा था। उसने जमील पुत्र फारूख के नाम से दस्तावेज भी बनवा रखे थे। पहले पूछताछ में उसने पुलिस को बरगलाने का प्रयास किया। सख्ती करने पर उसने खुद के भूरा होने और वारदात कर छिपकर रहने की बात कबूल कर ली।
डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार ने बताया कि आरोपी भूरा को न्यायालय में प्रस्तुत करने के साथ ही उसकी पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए प्रार्थनापत्र दिया गया है। रिमांड मिलने पर उससे कई सवालों के जवाब लिए जाएंगे। घटना में लूटी गई एक राइफल बरामद नहीं हुई है, उसकी भी जानकारी की जाएगी। पुलिस वांछितों के खिलाफ अभियान चला रही है।