कासगंज में पांच दिन पहले चामुंडा मंदिर पर बैरीकेड लगाने के विवाद से दोनों समुदायों में पैदा हो रही बदअमनी को यदि पुलिस भांप लेती और सतर्क हो जाती तो शायद इतनी बड़ी घटना न होती। कासगंज की फिजा खुशनुमा होती।
गणतंत्र दिवस को लेकर पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी किया था। पुलिस जगह-जगह चेकिंग अभियान भी चला रही थी, लेकिन इस हाई अलर्ट के बीच खुफिया तंत्र भी नगर के मिजाज को समझने में चूक कर गया।
खुफिया तंत्र का फेल होना भी प्रशासन के लिए बड़ी फजीहत का कारण बना। यह नगर संवेदनशील नगर के रूप में जाना जाता है। भले ही हाल फिलहाल में कोई बड़ी सांप्रदायिक घटनाएं नहीं हुईं, लेकिन सांप्रदायिक चुनौतियां भी कम नहीं थीं।
पुलिस ने मोर्चा संभाला
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5 दिन पहले चामुंडा मंदिर के गेट पर बैरीकेटिंग के मामले को लेकर एक समुदाय के लोग विरोध करते नजर आए। हालांकि पुलिस ने यह मामला शांत करा लिया, लेकिन यह मामला लगातार भीतर ही भीतर दोनों ही समुदाय के लोगों को खल रहा था।
खुफिया तंत्र इसका आकलन नहीं कर पाया। गणतंत्र दिवस पर हाई अलर्ट केवल कागजों में सिमट कर रह गया। लोगों के बीच हाई अलर्ट की सतर्कता सामने नहीं आ सकी।
दो समुदाय के बीच बदअमनी का कारण पांच दिन पहले से बना हुआ था। जब नगर के चामुंडा मंदिर पर पुलिस प्रशासन ने बैरीकेड लगाकर वाहनों का प्रवेश रोक दिया था।
नहीं रखी नजर
इस बात को लेकर दूसरे समुदाय के लोगों ने विरोध जताया था। प्रशासन ने मंदिर पर सुरक्षा तो कर दी, लेकिन अमन में खलल डालने पर नजर नहीं रखी।
इस पूरे मामले के बाद कमिश्नर सुभाष शर्मा का कहना है कि कहां किस स्तर पर चूक हुई है। इस बात की भी जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।