आगरा में बहुचर्चित बीएएमएस की कॉपियां बदलने के मामले में पुलिस ने 13 के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया है। आरोपी अभी जेल में बंद हैं। पुलिस मामले की विवेचना कर रही है।
उत्तर प्रदेश के आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के बीएएमएस की कॉपियां बदलने के मामले में पुलिस ने 13 के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया है। इसमें कई गवाह बनाए गए हैं। पुलिस का दावा है कि उसके पास केस से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।
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मामला थाना हरीपर्वत में दर्ज हुआ था। विश्वविद्यालय के बीएएमएस की कॉपियां बदलने का मामला 27 अगस्त 2022 को सामने आया था। पुलिस ने विश्वविद्यालय के टेंपो चालक को गिरफ्तार किया था। इसके बाद एक और मामला लिखा गया। इसमें 14 छात्रों की कॉपियां बदली गई थीं। छात्रों की कापियों में हस्तलेख भिन्न-भिन्न थे।
पुलिस ने कॉपियां लिखने वाले पुनीत और दलाल दुर्गेश की गिरफ्तारी की थी। तत्कालीन एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने विवेचना के लिए डीसीपी सिटी विकास कुमार के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था। एमबीबीएस की कॉपियां बदलने का मामला भी उजागर हुआ। तब थाना हरीपर्वत में तीसरा केस लिखा गया।
इनके खिलाफ लगी चार्जशीट
प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार ने बताया कि जेल में बंद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगा दी गई है। इनमें देवेंद्र, डॉ. अतुल, साल्वर पुनीत, दलाल दुर्गेश, राहुल पाराशर, शैलेंद्र बघेल, उमेश, भीकम सिंह, शिव कुमार दिवाकर, अतुल कटियार, रवि उर्फ रविंद्र राजपूत, इजमाम सहित 13 शामिल हैं। अभी विवेचना चल रही है।
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मुख्य आरोपी ने किया था कोर्ट में समर्पण
पुलिस ने सबसे पहले विश्वविद्यालय के टेंपो चालक देवेंद्र को जेल भेजा था। इसके बाद दिल्ली से डॉ. अतुल को पकड़ा। पुनीत और दलाल दुर्गेश की गिरफ्तारी हुई। मुख्य आरोपी छात्रनेता राहुल पाराशर कोर्ट में समर्पण करके जेल चला गया था। चार आरोपी छलेसर स्थित फार्मेसी कॉलेज के कर्मचारी शैलेंद्र बघेल, मूल्यांकन केंद्र का कर्मचारी उमेश, भीकम सिंह, पूर्व कर्मचारी शिव कुमार दिवाकर पकड़े गए।
कॉपियां बदलने का खेल कॉलेज से लेकर सेंटर में जमा करने की प्रक्रिया के बीच में होता था। कर्मचारी कॉपियां लेकर जाता था। वह निकलता तो विश्वविद्यालय एजेंसी के सेंटर के लिए था, लेकिन पहुंचता था गिरोह के पास। इसके बाद कॉपियां बदली जाती थीं। बदली कॉपियां लेकर एत्मादपुर स्थित एजेंसी के कार्यालय पर जाता था। कर्मचारी बिना कुछ देखे कॉपियां जमा कर लेते थे। यह सब खेल सांठगांठ से हो रहा था।
छात्रों पर नहीं हुई थी कार्रवाई
बीएएमएस परीक्षा की 14 और एमबीबीएस परीक्षा की 26 कॉपियां बदली गई थीं। यह बात विवेचना में सामने आई थी। जिन छात्रों की कॉपियों के हस्तलेख में अंतर था, उनके सैंपल लेकर कॉपियों को फॉरेंसिक लैब भेजा गया था। इनसे छात्रों के हस्तलेख से मिलाना किया जाना था। मगर, अभी तक रिपोर्ट नहीं आ सकी है।
छात्रों की कॉपियां बदली गई थीं। यह काम रुपये लेकर होता था। यह छात्रों की सांठगांठ के बिना नहीं हो सकता है। उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। छात्रों से पूछताछ क्यों नहीं की गई ? कॉपी बदलने वाले गैंग के तार और भी लोगों से जुड़े हो सकते हैं।
बीएमएमएस और एमबीबीएस की कॉपियां बदलने का मामला सामने आने के बाद डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. विनय पाठक भी भ्रष्टाचार के आरोप में फंस गए। उनके खिलाफ लखनऊ के थाना इंदिरा नगर में केस दर्ज हुआ था। मामले की विवेचना एसटीएफ कर रही थी। टीम ने विश्वविद्यालय में डेरा डाला था। फर्जीवाड़े की कलई खुलती उससे पहले ही विवेचना सीबीआई को ट्रांसफर हो गई।
पुलिस के रडार पर 40 छात्र
पुलिस का कहना है कि बीएएमएस के 14 और एमबीबीएस के 26 छात्र जांच के घेरे में हैं। इनकी कॉपियां बदली गई थीं। साक्ष्य संकलन किया जा रहा है।