महिला मंगलवार को एसओ रोहित गुर्जर से मिलने पहुंचीं। उन्हें केस की जानकारी नहीं थी। उन्होंने तत्कालीन एसएचओ भानु प्रताप सिंह से बात की। उन्होंने बताया कि घटना नहीं खुली है। केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। उनके केस में विवेचक राजकुमार गोस्वामी थे। वह पूर्व में निलंबित हुए थे। एसओ ने उनसे फोन पर बात की। वह थाने में ही थे।
महिला का आरोप है कि पूर्व विवेचक एसओ के कमरे में आ गए। उन्हें बदतमीज कहने लगे। उन्हें बुरा लगा। उन्होंने अपना मोबाइल निकालकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया। यह देखकर एसओ ने मोबाइल छीनने की कोशिश की। उन्होंने (पीड़ित महिला) कार्यालय से बाहर आने की कोशिश की। मगर पुलिसकर्मियों ने कुंडी लगा दी। महिला दरोगा मनीषा आ गईं। उन्होंने धक्का देकर मोबाइल छीन लिया। चांटे मारने लगीं। हाथ पीछे पकड़ लिए।
आरोप है कि उन्हें कमरा बंद करने के बाद बेरहमी से पीटा गया। कपड़े फाड़ दिए गए। घरवालों से बात नहीं करने दी। ढाई घंटे बाद शांति भंग में चालान कर दिया। शाम को एसीपी कोर्ट में पेशी कराई, तब जमानत मिली।
तीन वीडियो आए सामने
महिला और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद के तीन वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो में महिला को थाना परिसर में तीन पुलिसकर्मी पकड़ने का प्रयास कर रही हैं। दूसरा वीडियो एक कमरे का है। इसमें महिला और महिला दरोगा के बीच मारपीट होती नजर आ रही है। यह दोनों वीडियो पुलिस अपनी सफाई में दिखा रही है। वहीं तीसरा वीडियो पीड़ित महिला का है जिसमें वो फूट-फूटकर रो रही है। मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री से न्याय की गुहार ला रही है। अपने चेहरे पर लगी चोट भी दिखा रही हैं।
सपा की मीडिया सेल ने किया एक्स पर पोस्ट
इस मामले में समाजवादी पार्टी मीडिया सेल ने एक्स पर पोस्ट किया। इसमें लिखा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की पुलिस भाजपा सरकार में बेलगाम है। इस घटना की जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, पीड़ित महिला को न्याय दिलाने की मांग की। समाजवादी पार्टी के पोस्ट पर पुलिस ने जवाब दिया। इसमें कहा कि महिला ने उपनिरीक्षक मनीषा के साथ अनुचित व्यवहार किया। गाली-गलाैज और मारपीट की। खुद को नुकसान पहुंचाने का भी प्रयास किया। महिला के पुलिस पर लगाए आरोप निराधार और असत्य हैं।
उठ रहे सवाल
क्या थाने में वीडियो बनाना अपराध है? पीड़िता अपने केस की जानकारी लेने आई थी। विवाद की स्थिति में केस क्यों नहीं लिखा गया? महिला के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की गई। मगर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
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