फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गजब कारनामा: जिस सामान की चोरी 2004 में हुई, वह 2006 में बना था; गुडवर्क के चक्कर में बुरी फंसी पुलिस

Fri, 04 Sep 2026 08:56 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में 2004 की चोरी के मामले में पुलिस ने जिन सामानों की बरामदगी दिखाई, उन पर 2005 और 2006 की निर्माण तिथि दर्ज मिली। इस विरोधाभास और ठोस साक्ष्य के अभाव में अदालत ने आरोपी हन्नो को 21 साल बाद बरी कर दिया।
विज्ञापन
agra police - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पुलिसिया कार्यप्रणाली की एक अजब-गजब बानगी सामने आई है। एक जनरल स्टोर में चोरी का मामला 21 साल तक तारीखों में उलझा रहा और अंततः सबूतों के अभाव में ढह गया। इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू पुलिस की तफ्तीश का वह हिस्सा रहा, जिसकी पोल खुद सामान के निर्माण वर्ष ने खोल दी।
विज्ञापन


इस पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम विनीता सिंह ने थाना खेरागढ़ क्षेत्र के गांव छोटी पहाड़ी निवासी आरोपी हन्नो को बरी करने के आदेश दिए। मामला जगदीशपुरा थाने का है। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, अवधेश कुमार गुप्ता ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि उनकी जनरल स्टोर की दुकान में 19 अक्तूबर, 2004 की देर रात अज्ञात चोर ताले तोड़कर घी, रिफाइंड, सिगरेट के पैकेट, पान मसाला, फेस क्रीम, चायपत्ती, डालडा, पेस्ट और नकदी समेत काफी सामान चोरी कर ले गए।

विज्ञापन


पुलिस ने 23 नवंबर, 2004 को पथौली स्टेशन के पास दबिश देकर आरोपी हन्नो, शरीफ, रामकिशोर, संजय उर्फ निजामुद्दीन और एक महिला आरोपी राजकुमारी को हिरासत में लिया। पुलिस ने भारी-भरकम दावों के साथ बरामदगी की यह फेहरिस्त अदालत के सामने पेश की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी शरीफ की मृत्यु हो गई और अन्य आरोपियों की पत्रावली अलग होने के कारण हन्नो के खिलाफ ही विचारण हुआ। 21 साल में सिर्फ वादी और एक पुलिसकर्मी गवाही देने अदालत में पहुंचे।
विज्ञापन


मामले में बचाव पक्ष ने महत्वपूर्ण सवाल उठाया। कहा कि दुकान में चोरी 2004 में हुई थी, उसी चोरी के बरामद माल के तौर पर अदालत में पेश किए गए कोलगेट पेस्ट, साबुन आदि पर 2005 की निर्माण तिथि, जबकि डालडा पर 2006 की निर्माण तिथि दर्ज थी। जो चोरी की घटना 2004 की थी, उस मामले में दो साल बाद निर्मित सामान चोरों से कैसे बरामद किया गया। इस तकनीकी और तार्किक विरोधाभास ने पुलिस की पूरी कहानी की हवा निकाल दी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें