मैनपुरी। पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों में अब जांचकर्ता मनमानी नहीं कर सकेंगे। अगवा हुईं किशोरियों की तलाश हर हाल में करनी होगी। मामले में पुख्ता साक्ष्य के बिना एफआर नहीं लगा सकेंगे। हाल ही मुख्यमंत्री ने भी पॉक्सो एक्ट के मामलों में सख्ती के साथ कार्रवाई करने के निर्देश पुलिस को दिए हैं।
थानों में किशोरियों को अगवा किए जाने के मामले तो दर्ज कर लिए जाते हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर जांचकर्ता काफी सुस्ती बरतते हैं। पूर्व में कई ऐसे मामले सामने आए जिसमें पीड़िताओं का पता न लगने पर विवेचक द्वारा एफआर लगाकर मामले की जांच रोक दी गई। तत्कालीन एसपी अजय शंकर राय की ओर से विवेचकों की जमकर फटकार लगाते हुए चेतावनी दी गई थी। वहीं मामलों की जांच दोबारा शुरू करके शत प्रतिशत बरामदगी करने के लिए कहा गया था। इस तरह के मामले सामने आने के बाद अब प्रशासन भी सख्त हो गया है।
पॉक्सो एक्ट के इस तरह के मामलों में जांचकर्ता अब मनमानी नहीं कर सकेंगे। बगैर पुख्ता साक्ष्य के मामले में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) नहीं लगा सकेंगे। वहीं अगवा पीड़िता का पता लगाने के साथ ही आरोपी की गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी रहेंगे। इसके बाद से ही महकमे में आदेशों पर अमल की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
ढाई महीने में सात मामले हुए दर्ज
जनपद में प्रतिमाह नाबालिग किशोरियों के अगवा किए जाने के करीब दो से तीन मामले दर्ज कराए जाते हैं। वर्ष 2019 में तकरीबन 35 से अधिक मामले सामने आए। पुलिस के अनुसार कई मामलों में नाबालिग वापस आ चुकी हैं। आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं वर्ष 2020 में अब तक करीब सात मामले विभिन्न थानों में दर्ज हुए हैं।
पॉक्सो एक्ट के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। आरोपी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के लिए सभी थानाध्यक्षों को निर्देशित किया गया है। दर्ज मामलों में पुलिस गंभीरता के साथ जांच व कार्रवाई करती है।
ओमप्रकाश सिंह, एएसपी
आशीष दीक्षित