आगरा। नेहरू नगर क्लब के मंच पर शुक्रवार को जब शब्दों के दीप जले और भावनाओं की बयार बही तो पूरा माहौल उत्सव में बदल गया। कवियों ने अपने शब्दों से समाज और राजनीति की विसंगतियों पर प्रहार किया।
उद्घाटन मुख्य अतिथि समाजसेवी राम शरण मित्तल एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने किया। यश भारती से सम्मानित कवि डॉ. विष्णु सक्सेना ने सुनाया ‘तपती हुई जमीं है जलधार बांटता हूं, पतझड़ के रास्तों में बहार बांटता हूं।’ पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
राष्ट्रीय कवि सुदीप भोला ने राजनीति और समाज की विसंगितयों पर कटाक्ष करते हुए सुनाया... तब कहीं रावण मारेगा, जो यहां जैसा करेगा, वो यहां वैसा भरेगा। दिनेश रघुवंशी (फरीदाबाद) ने शृंगार रस की कविताओं से सभी को मोहित कर दिया।
हास्य व्यंग्यकार पवन आगरी ने गरीब आदमी के बैंक से लोन लेने पर जेल जाने को कविताओं के माध्यम से सुनाया। इस रचना ने श्रोताओं को हंसी के साथ सोचने पर भी मजबूर किया। डॉ. रूचि चतुर्वेदी की रचना में धर्म, संस्कृति और आदर्शों की गूंज सुनाई दी।
संस्थापक सतीश इंजीनियर ने बताया कि आयोजन आठ वर्षों से सनातन संस्कृति को समर्पित है। सम्मेलन में गौरी मिश्रा, हेमा शर्मा, लटूरी सिंह लट्ठ, दिनेश रघुवंशी और अनिल बेधड़क ने कविताओं से समां बांधा। इस दौरान महेश सिंघल, सुधीर गुप्ता, महेश गुप्ता, मनीष गर्ग, दीपक अग्रवाल, अभिषेक जैन, प्रदीप अग्रवाल, शिल्पी गुप्ता आदि की मौजूदगी रही।