उत्तर प्रदेश के आगरा पहुंचे हास्य कवि, लेखक, विचारक वाहे गुरु भाटिया ने अमर उजाला की 75 वर्षों की यात्रा पर शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर उन्होंने पंजाब के अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में चेहरे में तिरंगा लगा होने की वजह से एक युवती को जाने से रोकने पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग सरदार हो ही नहीं सकते।
इस पर हास्य कवि वाहे गुरु भाटिया ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि तिरंगे के लिए भगत सिंह हंसते हंसते फांसी पर चढ़ गए। हम कौन होते हैं किसी को तिरंगे के साथ प्रवेश से रोकने वाले। कहा कि तिरंगा मेरे वतन का है। मैं खुल्लम खुल्ला उसे संदेश दे रहा हूं कि वह सरदार हो ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि हमारे ग्रंथ साहब के अंदर प्रभुश्री राम की वाणियां हैं। हम होते कौन हैं रोकने वाले।
इसके बाद उन्होंने अपने स्वभाव के मुताबिक कुछ हास्य की पंक्तियां भी सुनाईं। उनके हास्य के चुटकुले सुनकर मौजूद लोग हंसी से लोटपोट हो गए। उन्होंने कोरोना पर कई सारे चुटकुले सुनाए। आइए पढ़तें हैं वाहे गुरु भाटिया के चुटकुले...
कहा कि... कोरोना चीन से आया। चीन जिसकी खुद की आंखे नहीं खुलतीं उसने पूरे विश्व की आंखे खोल दीं। चीन में सब दो फुटे लोग होते हैं, यदि वहीं कभी कोई लंबा आदमी मिल जाए तो समझ लेना चाहिए कि हमारे पुरखों का वहां आना जाना रहा है।