मथुरा महानगर क्षेत्र के हाईवे स्थित मिर्जापुर निवासी राकेश ने एक साल पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन किया था। अब तक कोई जानकारी नहीं दी गई है कि इस योजना में उसका चयन हुआ है या नहीं। राकेश बताते हैं कि इसके लिए डूडा कार्यालय के चक्कर लगाते हुए थक गया हूं। कोई सुनने को तैयार नहीं है। दलाल पैसा मांग रहे हैं।
महानगर क्षेत्र में यमुनापार स्थित ईशापुर निवासी सुमित ने आठ माह पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। थक गए हैं चक्कर लगाते हुए। बताते हैं कि डूडा कार्यालय में कोई कुछ बताने को तैयार ही नहीं है। अधिकारी से भी कई बार मिले हैं, यही कर दिया जाता है कि पैसा मिल जाएगा।
ये भी पढ़ें: मथुराः प्रधानमंत्री की सुरक्षा का ब्लू प्रिंट तैयार, कार्यक्रम में यह कपड़े पहनकर नहीं आ सकेंगे
कोन्हई के रहने वाले त्रिलोकचंद्र का परिवार झोंपड़ी में रहता है। दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं। हाथ कटा हुआ है, फिर भी किसी तरह परिवार का लालन-पालन कर रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पिछले तीन साल से 7 बार आवेदन किया है, लेकिन अब तक तो कुछ नहीं मिला है। त्रिलोकचंद्र के तीन और भाई इसी स्थिति में हैं। उनके पास भी रहने के लिए पक्का मकान नहीं है।
मोदी सरकार की आयुष्मान भारत योजना के कार्डधारक जनरलगंज निवासी नौरंगीलाल को चार माह पहले पैर में फैक्चर हुआ था। इस कार्ड से घाव के उपचार के लिए एक माह तक निजी अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन किसी ने उपचार नहीं दिया।
जिला अस्पताल ने भी पैर का ऑपरेशन करने से मना कर दिया। पैसे के अभाव में परेशान नौरंगीलाल ने राजस्थान के जयपुर स्थित सवाई मानसिंह अस्पताल की शरण ली। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नौरंगीलाल का पैर काटा गया। कहा कि उपचार में देरी के इसका कारण बनी है।
आयुष्मान कार्ड धारक रिजवाना बच्चे को जन्म देने जा रही है। परिजनों ने उसे जिला महिला अस्पताल में तीन दिन पहले भर्ती कराया था, लेकिन एक दिन रखने के बाद सरकारी चिकित्सकों ने रात में ही उसे बाहर जाने के लिए कह दिया।
रिजवाना के परिजनों ने कहा उनके पास प्राइवेट इलाज के लिए पैसे नहीं है, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। आयुष्मान कार्ड को लेकर रिजवाना के परिजन कई निजी हॉस्पिटल गए, लेकिन किसी ने कार्ड से इलाज नहीं दिया। अब रिजवाना चैरिटेबिल हॉस्पिटल में भर्ती कराया है।