तब माहौल चुनावी था, वायदे भी चुनावी थे, लेकिन आगरा की अनदेखी के मुद्दे उठाए गए थे, वह 60 साल पुराने थे। एयरपोर्ट, पानी, यमुना, आलू और पर्यटन की बदहाली पर सवाल उठाए। ठीक तीन साल पहले इसी कोठी मीना बाजार मैदान पर तब प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रहे नरेंद्र मोदी ने आगरा की अनदेखी पर राज्य और केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया था, लेकिन ढाई साल से केंद्र की सत्ता पर काबिज प्रधानमंत्री मोदी आज उसी मैदान पर आएंगे। लोगों की उम्मीदें यही हैं कि जिन जख्मों को उन्होंने कुरेदा था, अब कम से कम उनकी दवा तो देकर जाएंगे। जिन मुद्दों पर तब मोदी ने फोकस किया, उनमें केंद्र सरकार ने क्या किया, जानिए इस रिपोर्ट में
न एयरपोर्ट बना, न हवाई उड़ानों से जुड़ा आगरा
खेरिया हवाई अड्डे की जिस हवाई पट्टी पर प्रधानमंत्री के रूप में मोदी उतरेंगे, उस पर अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें शुरू नहीं हो सकीं। केंद्र सरकार की एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया को सिविल एन्क्लेव का निर्माण करना है, लेकिन राज्य सरकार से जमीन की मांग के चक्कर में काम शुरू नहीं हो सका। केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर में बनाने के पक्ष में है, जबकि मोदी खुद तीन साल पहले इसी मैदान पर आगरा में एयरपोर्ट न होने पर हैरत जता चुके हैं। एयरपोर्ट तो दूर, आगरा किसी भी महानगर या मेट्रो सिटी से हवाई उड़ान के जरिए नहीं जुड़ सका।
मेक इन इंडिया का शोकेस फुटवियर, पैकेज तक नहीं
देश के 65 फीसदी घरेलू और 27 फीसदी निर्यात में हिस्सेदार आगरा के जूता उद्योग को प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया का शोकेस तो बनाया, लेकिन पैकेज का एलान नहीं किया। चीन की चुनौती से जूझ रहे फुटवियर उद्योग को रियायतों के साथ बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्किड लेबर की जरूरत है, लेकिन ढाई साल में आगरा की झोली खाली ही है। टैक्स और अन्य मामलों में लेदर फुटवियर की मदद के लिए केंद्र सरकार के बड़े कदम नहीं उठाए
देश के पर्यटन का आइना है आगरा, पर टिकट महंगा
हिंदुस्तान के पर्यटन का आइना ताजमहल है, लेकिन मोदी सरकार में पर्यटन मंत्री डा. महेश शर्मा ने पद संभालते ही ताजमहल समेत सभी स्मारकों के प्रवेश टिकट दो से तीन गुने तक कर दिए। तीन साल पहले की रैली में पर्यटन में अपार संभावनाएं नजर आ रही थीं, लेकिन सत्ता संभालते ही पर्यटन के लिए कोई कदम ही नहीं उठाया गया। लग्जरी टैक्स बरकरार है, रेस्टोरेंट में खाने पर टैक्स जारी है और भारत के स्मारक घूमना महंगा हो ही गया।
ईमानदारी से देखें तो तीन साल पहले आगरा के लिए जो वायदे किए गए थे, उनमें से एक भी पूरा नहीं हो पाया। केंद्र सरकार जो काम कर सकती थी, वह भी नहीं किए गए। जूता उद्योग हो या एयरपोर्ट, कुछ भी नहीं बदला
नजीर अहमद, पूर्व अध्यक्ष, एफमेक
ताजमहल के शहर में एयरपोर्ट पर केंद्र और राज्य सरकार फुटबाल का खेल खेल रहे हैं। प्रधानमंत्री चाहते तो अब तक एयरपोर्ट बन चुका होता। गोवा में आगरा की तरह ही एयरफोर्स के साथ फ्लाइट आती हैं, वहां नए एयरपोर्ट का शिलान्यास हो गया, लेकिन आगरा इंतजार कर रहा है।
शमशुद्दीन, पूर्व अध्यक्ष, एप्रूव्ड गाइड एसो