मतदाताओं का किसी एक पार्टी या प्रत्याशी से स्थायी मोह नहीं होता। अगर ऐसा नहीं होता तो वह अब तक 11 दलों को जिले से अलविदा नहीं कर चुके होते। इनमें से कुछ दल तो ऐसे भी थे, जिन्होंने जिले की नौ में से छह सीटें तो जीतीं लेकिन फिर किसी चुनाव में उसका प्रत्याशी जीत का स्वाद नहीं चख सका।
1957 के चुनाव में प्रजा सोसलिस्ट पार्टी (पीएसपी) का पहला और आखिरी प्रत्याशी चुनाव जीता। इसके बाद कई दल आए और गए। मगर, कांग्रेस जिले में एकमात्र ऐसी पार्टी है, जिसके प्रत्याशी पहले चुनाव से लेकर अब तक चुनावी मैदान में नजर आते हैं। जिले में भाजपा का 1985 में एक सीट पर जीत के साथ पहली बार खाता खुला। बसपा ने 1996 में दो सीटें जीतकर अपनी दस्तक दी। इससे पहले समाजवादी पार्टी ने 1993 में एक सीट जीतकर अपनी आमद तो दर्ज करा दी थी लेकिन इसके बाद 2012 में ही बाह सीट से अरिदमन सिंह के रूप में उसका प्रत्याशी जीता। 2002 के चुनाव में दो सीटें जीतकर जाटों की राजनीति को जिले में गर्माने वाली रालोद की अब तक यह पहली और आखिरी जीत थी। इसके बाद से अब तक उसका एक भी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीता।
दल वर्ष जीते प्रत्याशी
प्रजा सोसलिस्ट पार्टी 1957 1
सोसलिस्ट पार्टी 1962 2
रिपब्लिकन पार्टी 1962 2
भारतीय जनसंघ 1967 3
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया 1967 1
इंडियन नेशनल कांग्रेस (आर्गनाइजेशन) 1974 1
जनता पार्टी 1977 6
जनता पार्टी (सेक्युलर) चौधरी चरण सिंह 1980 3
लोकदल 1985 3
जनमोर्चा 2007 1
रालोद 2002 2