आगरा। प्रयागराज में हुई उत्तर प्रदेश एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भेजी गई जिले की टीम के चयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव नरेंद्र सिंह ने प्रतियोगिता के लिए बिना ट्रायल लिए ही मनचाहे खिलाड़ियों की टीम बनाकर भेज दी। चौंकाने वाली बात ये है कि टीम के चयन की जानकारी जिला एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष एसवीएस राठौर को भी नहीं दी। वहीं खिलाड़ी भी ट्रायल का इंतजार करते रहे।
प्रयागराज में 7 और 8 मई को दो दिवसीय राज्य उत्तर प्रदेश एथलेटिक्स प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था। इसके लिए टीम का चयन एकलव्य स्टेडियम में ट्रायल के बाद होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एथलीटों का कहना है कि उन्हें न तो ट्रायल की कोई सूचना दी गई और न ही प्रतियोगिता के बारे में बताया गया। इससे वे अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर से वंचित रह गए।
हालांकि, ज्यादातर खिलाड़ी इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वे सामने आए तो भविष्य में उनके चयन पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि हमें तो यह भी नहीं पता था कि टीम कब बन गई। हैरत इस बात की है कि जिला एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष एसवीएस राठौर और उपाध्यक्ष व एशियाई खेलों के पदक विजेता रतन सिंह भदौरिया ने भी टीम के चयन की जानकारी से इन्कार किया।
अध्यक्ष ने कहा कि हमें न तो ट्रायल और न ही टीम गठन के बारे में कोई जानकारी दी गई। प्रतियोगिता के बारे में भी नहीं बताया गया। उपाध्यक्ष ने कहा कि जब ट्रायल ही नहीं हुआ तो चयन प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खिलाड़ियों को अवसर मिलना चाहिए था। यह विवाद सिर्फ एक चयन प्रक्रिया का नहीं, बल्कि उन खिलाड़ियों के भविष्य का है जो मौके के इंतजार में मेहनत कर रहे हैं।
इस संबंध में जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव नरेंद्र सिंह ने कहा कि 6 मई को आगरा कैंट के मैदान पर ट्रायल आयोजित किए गए थे। खिलाड़ियों को व्हाट्सएप से सूचना दी गई थी। उपाध्यक्ष रतन सिंह भदौरिया बीमार रहते हैं, इसलिए उन्हें जानकारी नहीं दी गई। मैं उत्तर प्रदेश एथलेटिक्स संघ का भी सचिव हूं। व्यस्तता के कारण जिला एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष को जानकारी नहीं दे सका। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भेजी गई टीम के खिलाड़ियों ने चार पदक हासिल किए हैं।