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राहतः एसएन में प्लाज्मा थेरेपी से बची 38 संक्रमित मरीजों की जान

Thu, 08 Oct 2020 10:21 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • 64: लोगों ने किया है प्लाज्मा दान
  • 60: मरीजों का प्लाज्मा थेरेपी से हुआ इलाज
  • 38: मरीज ठीक होकर हुए डिस्चार्ज
  • 18: मरीजों की हो चुकी है मौत
  • 04: मरीजों को अभी चल रहा इलाज
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प्लाज्मा थेरेपी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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एसएन मेडिकल कॉलेज में कोरोना वायरस के 63 फीसदी संक्रमित मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी कारगर साबित हो रही है। इस थेरेपी से अभी तक 38 लोगों की जान बचाई जा चुकी है। चार मरीजों का अभी इलाज चल रहा है, यह आइसोलेशन वार्ड में भर्ती हैं। 
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एसएन कॉलेज में अभी तक कोरोना वायरस के 60 संक्रमित मरीजों का इलाज किया गया। इनकी हालत बेहद गंभीर थी। प्लाज्मा थेरेपी के लिए इनकी रिपोर्ट बनाकर इलाज शुरू किया गया। 58 मरीज आईसीयू में भर्ती थे, जिनको प्लाज्मा देने के बाद हालत में सुधार हुआ और पांच से सात दिन बाद आईसीयू से सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिए गए।

जरूरत पर दो बार भी थेरेपी दी गई, इससे 38 मरीज पूरी तरह से ठीक हो गए, लेकिन 18 मरीजों को बचाया नहीं जा सका। चार मरीजों को यह थेरेपी अभी दी जा रही है। प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि अभी तक उपयोग 
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छह लोग दो बार से अधिक कर चुके हैं प्लाज्मा दान: 
ऐसे भी महादानी हैं, जिन्होंने दो बार से भी अधिक प्लाज्मा दान किया है। इसमें अर्जुन वर्मा ने तीन बार और डॉ. आरके सिंह, प्रदीप चौधरी, रोबिन जैन, राजेश मांगवानी और कैलाश चंद्र दो-दो बार मरीजोंके इलाज के लिए प्लाज्मा दान कर चुके हैं।

                                           


क्या है प्लाज्मा थेरेपी:
कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक होने के 90 दिन में प्लाज्मा दान किया जा सकता है। इससे पहले उसके शरीर में एंटीबॉडी की जांच कराई जाती है। इसमें एंटीबॉडी को स्तर 118 से अधिक होने पर ही प्लाज्मा दान किया जा सकता है। इसे समान ग्रुप वाले मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया जाता है। इससे मरीज के रक्त में वायरस की रोकथाम के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से विकसित होने लगती है।
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