वीकएंड या त्योहार पर लगातार छुट्टियों में ताज देखने आना किसी सजा से कम नहीं। टिकट के लिए लंबी कतार, फिर सुरक्षा जांच कतार और लपकों के चक्रव्यूह से निकलकर ताज देखने अंदर पहुंच भी जाएं तो नंगे पांव ही मुख्य गुंबद पर जाना होगा। प्रदेश सरकार शू कवर तक पर्यटकों को उपलब्ध नहीं करा पा रही, जबकि 438 करोड़ रुपये के बड़े प्रोजेक्ट का शिलान्यास जरूर किया गया। ताजगंज प्रोजेक्ट को जोड़ लें तो प्रदेश सरकार 635 करोड़ रुपये निर्माण पर खर्च कर रही है, लेकिन पर्यटकों की बुनियादी सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ये हाल तब है जब लगातार तीसरे साल आगरा में पर्यटकों की संख्या में 60 हजार की कमी आई है।
ताजमहल पर लगातार तीसरे साल विदेशी सैलानियों की संख्या में कमी आई, लेकिन सूबे के मंत्रियों का दावा है कि आगरा में पर्यटक बढ़े हैं, जबकि देश में घट रहे हैं। देश में 68 लाख विदेशी पर्यटक आए, लेकिन आगरा उनमें से केवल 6.39 लाख ही पहुंचे। सैलानियों में गिरावट के कारणों पर तो सरकार का फोकस नहीं है, लेकिन निर्माण पर जोर जरूर है। 635 करोड़ रुपये की पर्यटन योजनाओं का काम शुरू किया है, लेकिन पर्यटकों की सुविधा के लिए पथकर की रकम भी खर्च नहीं हो पा रही। ताज पर विदेशी सैलानियों के लिए शूकवर पर आगरा विकास प्राधिकरण खर्च कर रहा है, लेकिन भारतीय पर्यटकों को यह मयस्सर नहीं। ताज पर 58 लाख भारतीय पर्यटक बीते साल आए, लेकिन भेदभाव बरतते हुए इनकी सुविधा पर प्रदेश सरकार गौर नहीं कर रही।
400 करोड़ का खर्चा, पर्यटकों की नहीं चर्चा
ताजमहल पूर्वी गेट पर शिल्पग्राम को तोड़कर 11.55 एकड़ जमीन पर बनने वाले ताज ओरिएंटेशन सेंटर पर प्रदेश सरकार 231.85 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, लेकिन तीन मंजिला पार्किं ग को छोड़कर कोई ऐसा प्रावधान नहीं जो मौजूदा शिल्पग्राम में न हो। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब शिल्पग्राम में शिल्पियों के 24 कॉटेज तैयार हैं तो उन्हीं की मरम्मत कराकर पर्यटन निगम सुईट की तरह से पर्यटकों को ठहराए। इससे सरकार के 231 करोड़ रुपये भी बचते और निगम की कमाई थी बढ़ती। यही नहीं, ताज महोत्सव के लिए भी अब नई जगह तलाशनी होगी।
कैसे आएंगी मुगल म्यूजियम में कलाकृतियां
ताज महल पूर्वी गेट पर 1300 मीटर दूर 5.9 एकड जमीन पर प्रस्तावित मुगल म्यूजियम पर सरकार 141.89 करोड़ रुपये खर्च करेगी, लेकिन इस पर तो सबसे पहले सवाल खड़े होने शुरू हुए। आगरा में तीन म्यूजियम पहले से मौजूद हैं। इतिहासकारों के साथ पर्यटन उद्यमियों ने उन्हीं को अपग्रेड करने का सुझाव दिया था, लेकिन तत्कालीन पर्यटन महानिदेशक अमृत अभिजात ने मुगल म्यूजियम को ही आगे बढ़ाया। एएसआई का ताजमहल और फतेहपुर सीकरी में और नगर निगम का ताज म्यूजियम पालीवाल पार्क में मौजूद है। प्रदेश के म्यूजियम में दर्शाने के लिए कृतियां कहां से आएंगी, इस पर सूबे के अधिकारी भी चुप्पी साधे हैं। उनका फोकस केवल इमारत निर्माण पर है।