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ग्रहों और नक्षत्रों को बन रहा अद्भुत संयोग, माना जा रहा बेहद फलदायी

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कासगंज में लहलहाती सरसों की फसल - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। वसंत पंचमी का पावन पर्व मंगलवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी कहा जाता है। यह दिन छात्रों, कला, संगीत आदि से जुड़े लोगों के लिए बेहद खास होता है। कहा जाता है इस दिन से वसंत ऋतु की शुरूआत होती है। मान्यता है कि मां सरस्वती की उत्पत्ति भी इसी दिन हुई थी। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक ग्रहों और नक्षत्रों का अद्भुत संयोग बन रहा है। विधि-विधान से पूजा करने पर मां सरस्वती की विशेष कृपा बरसेगी।
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वसंत पंचमी के दिन दो खास संयोग इस बार बन रहे हैं। पहला अमृत सिद्धि और दूसरा सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा करने पर भी कृपा बरसेगी। पुष्प, धूप, दीप आदि से पूजन करें।
इस तरह करें पूजा अर्चना
- मां सरस्वती की प्रतिमा या मूर्ति को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
- रोली, चंदन, हल्दी, केसर, पीले या सफेद रंग के पुष्प, पीली मिठाई और अक्षत अर्पित करें।
- मां सरस्वती की वंदना का पाठ करें।
- विद्यार्थी मां सरस्वती के लिए व्रत रखें।
यह रहेगा शुभ मुहूर्त
- 16 फरवरी सुबह 3 बजे के बाद लगेगी पंचमी की तिथि।
- 17 फरवरी सुबह 5:46 बजे खत्म हो जाएगी पंचमी की तिथि।
- 16 फरवरी को सुबह 11:30 से 12:30 तक पूजन का है विशेष मुहूर्त।
ज्योतिषाचार्य की बात
सोरों के ज्योतिषाचार्य पंडित दिलीप शास्त्री का कहना है कि मां सरस्वती का पूजन लाल, पीले पुष्प से करना चाहिए। मंगलवार को वसंत पंचमी पर्व पर रेवती नक्षत्र रहेगा। जो सूर्य योग है। उनका कहना है कि पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार बनाया तो उन्हें पेड़, पौधे, जीव सब दिख रहा था, लेकिन कुछ कमी महसूस हो रही थी। तो उन्होंने कमल पर जल छिड़का तो एक सुंदर स्त्री के रुपये में देवी प्रकट हुईं। हाथ में वीणा, पुस्तक, माला थे। यह देवी थी मां सरस्वती और दिन था वसंत पंचमी का। तभी से वसंत पंचमी पर्व मनाया जाता है।
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