मैनपुरी। आज से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है। पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष भाद्रपद महीने की पूर्णिमा से शुरू होकर पितृमोक्ष अमावस्या तक चलते हैं। पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों को याद कर उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है। जिले में पितृ पक्ष के लिए घरों में तैयारियां पूरी कर ली गई है। श्रद्धाभाव के साथ पितरों को तर्पण किया जाएगा।
आचार्य रामानंदन ने बताया शास्त्रों के अनुसार पितृ 15 दिन तक पृथ्वी पर रहने के बाद अपने लोक लौट जाते हैं। इस दौरान पितृ परिजनों के आसपास रहते हैं। इसलिए इन दिनों कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे पितृ नाराज हों। आचार्य ने बताया कि इस साल 20 सितंबर से छह अक्तूबर तक पितृ पक्ष हैं। पितृ के तर्पण के लिए रविवार को बाजार में लोगों ने जरूरी सामान की खरीदारी की। इस दौरान बाजारों में भीड़ देखी गई।
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इन कार्यों से नाराज होते हैं पितृ
श्राद्ध कर्म करने वाले सदस्य को इन दिनों बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए। उन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। श्राद्ध कर्म हमेशा दिन में करें। सूर्यास्त के बाद श्राद्ध करना अशुभ माना जाता है। इन दिनों में लौकी, खीरा, चना, जीरा और सरसों का साग नहीं खाना चाहिए। जानवरों या पक्षी को सताना नहीं चाहिए।
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प्रसन्न करने के लिए करें ये काम
पितृपक्ष में अगर कोई व्यक्ति, जानवर या पक्षी आपके घर आए तो उसे भोजन कराना चाहिए। मान्यता है कि पूर्वज इन रूप में आपसे मिलने आते हैं। पितृपक्ष में पत्तल पर भोजन करें और ब्राह्राणों को भी पत्तल पर भोजन कराएं तो फलदायी होता है।
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शुभ कार्य रहेंगे बंद
पितृ पक्ष में कोई भी शुभ काम जैसे शादी, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश, घर के लिए महत्वपूर्ण चीजों की खरीददारी वर्जित है। नए कपड़े या किसी प्रकार की खरीददारी को भी अशुभ माना गया है। इस दौरान बेहद सादा जीवन जीने और सात्विक भोजन करने के लिए कहा गया है।
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