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सोरों में तर्पण से जल, नभ और थल में मिलती है मुक्ति

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सोरों(कासगंज)। वाराह तीर्थ सूकरक्षेत्र पौराणिक काल से पवित्र स्थल माना जाता है। गंगा का यह क्षेत्र तमाम पौराणिक मान्यताओं, मठ, मंदिरों को समेटे है। यहां न केवल अस्थि विसर्जन का महत्व है। बल्कि यह क्षेत्र मोक्ष का बड़ा धाम माना जाता है। जिसके परिणाम स्वरूप बड़ी संख्या में दूरस्थ क्षेत्रों के लोग यहां गंगास्नान, पूजा अर्चना, अस्थि विसर्जन, श्राद्ध आदि अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं।
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तीर्थनगरी के विद्वान बताते हैं कि यहां श्राद्ध करने से पितरों को मुक्ति मिलती है। गया में श्राद्ध करने से थल में मुक्ति मिलती है और वाराणसी में श्राद्ध करने से जल व थल दोनों में मुक्ति मिलती है एवं सूकर क्षेत्र में श्राद्ध करने से नभ, थल और जल तीनों से मुक्ति मिलती है। इस संबंध में शास्त्रों में वर्णन मिलता है- गयायां स्थले मुक्ति: वाराणस्यां - च जले स्थले, जलेस्थले चान्तरिक्षे - त्रिधामुक्ति स्तु सूकरे। जैसे यहां अस्थि विसर्जन के दौरान जो अस्थियां हरिपदी गंगा में विसर्जित की जाती हैं वह 72 घंटे में जलरूप में परिवर्तित हो जाती हैं। पितरों के मोक्ष की कामना को लेकर यहां श्राद्ध किया जाता है।
क्या है श्राद्ध
पितरों की तृप्ति के लिए श्रद्धा से किया गया कर्म ही श्राद्ध कहलाता है। पितृ पक्ष में अपने पितरों के निमित्य किए जाने वाले तर्पण का बड़ा महत्व होता है। श्राद्ध में काले तिल, दूध, गंगाजल सहित आदि वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है। पूरी पवित्रता के साथ श्रद्धा का भाव श्राद्ध करने में होना चाहिए। श्राद्ध करने की तीन प्रक्रियाए हैं। जिनमें पिंड दान, तर्पण और ब्राह्मण भोजन है। इसका वर्णन मनुस्मृति एवं अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
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श्राद्ध तिथियां
1 सितंबर पूर्णिमा श्राद्ध, 2 को प्रतिपदा श्राद्ध, 3 को द्वितीया श्राद्ध, 4 को तृृतीया श्राद्ध 6 को चतुुर्थी श्राद्ध, 7 को पंचमी श्राद्ध, 8 को षष्ठी श्राद्ध 9 को सप्तमी श्राद्ध,10 को अष्टमी श्राद्ध 11को नवमी श्राद्ध, 12 को दशमी श्राद्ध, 13 को एकादशी श्राद्ध, 14 को द्वादशी श्राद्ध, 15 को त्रयोदशी श्राद्ध, 16 को चतुुर्दशी श्राद्ध 17 को अमावस्या व सर्वपित्र श्राद्ध।
क्या कहते हैं विद्वान-
सूकरक्षेत्र में श्राद्ध करने मोक्ष मिलता है
- सूकरक्षेत्र में श्राद्ध कर्म तर्पण किया जाना शास्त्र सम्मत है। जबकि अन्य तीर्थों में ऐसा नहीं है। वाराह पुराण के अनुसार स्वयं भगवान वराह ने पृथ्वी से कहा है हे देवी जो भी प्राणी इस तीर्थ में अपने पूर्वजों का श्राद्ध तर्पण कर तप करेगा उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी -डॉ. राधाकृष्ण दीक्षित, सोरों।
सूकरक्षेत्र में श्राद्ध करने से तीनों लोकों से मिलती है मुक्ति
- सोरों सूकरक्षेत्र पवित्र स्थल है। शास्त्रों में बताया गया है कि यहां श्राद्ध करने से जल, थल, नभ तीनों लोकों से मुक्ति मिलती है। मृत्यु के बाद जिस लोक में पूर्वज जाएंगे उन्हें वहीं मुक्ति मिलेगी। सूकरक्षेत्र श्रीहरि का निर्वाणस्थल है। इससे श्रेष्ठ कोई दूसरा क्षेत्र नहीं है।- पंडित डॉ. अंबरीश निर्भय।
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