डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पीएचडी के शोधार्थी अब अपना शोध कार्य करते हुए संबंधित विभागों में पढ़ाएंगे भी। शोधार्थियों को प्रति माह 10 हजार रुपये मानदेय भी दिया जाएगा। अधिकतम तीन वर्ष तक सेवाएं ली जाएंगी। प्रभारी कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई वित्त समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
पीएचडी के वह शोधार्थी जिनका कोर्स वर्क पूरा हो गया है, उन्हें टीचिंग असिस्टेंट के रूप में रखा जाए। मानदेय पर शोधार्थियों से संबंधित विभागों में शिक्षण कार्य कराया जाएगा। शोधार्थियों से 10 से 14 घंटे का साप्ताहिक शिक्षण कार्य कराया जाएगा। उसका वर्क लोड कम करके ही संबंधित विभागों में अतिथि शिक्षक रखे जाएंगे। वर्क लोड के अनुरूप ही अतिथि शिक्षकों को वेतन दिया जाएगा। विश्वविद्यालय के पीआरओ प्रो. प्रदीप श्रीधर ने बताया कि शोधार्थियों का अधिकतम तीन वर्ष के लिए मानदेय निर्धारित किया जाएगा। प्रति वर्ष उसकी समीक्षा की जाएगी। विभागाध्यक्ष व निदेशक की संस्तुति पर विस्तार दिया जाएगा।
संस्थान व विभाग की आय के अनुरूप वेतन
वित्त समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि किसी संस्थान व विभाग में संचालित सेल्फ फाइनेंस कोर्स में पढ़ाने वाले शिक्षकों का वेतन संबंधित विभाग या संस्थान की आय के अनुरूप निर्धारित किया जाएगा। प्रभारी कुलपति की ओर से इसके लिए कमेटी बनाई गई है। कमेटी में आईक्यूएसी के निदेशक, संबंधित संस्थान या विभाग के निदेशक व विभागाध्यक्ष, डीन एकेडमिक व कुलसचिव हैं। यह समीक्षा करेंगे कि संबंधित विभाग या संस्थान में शिक्षक का वेतन कितना हो सकता है। कुल आय का 75 फीसदी स्टाफ के वेतन में जाएगा। फैकल्टी के 60 फीसदी व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए 15 फीसदी होगा। तीन वर्ष की कार्ययोजना देनी होगी।
सेवानिवृत्ति के दिन ही देयकों का होगा निस्तारण
वित्त समिति की बैठक में तय किया गया कि विश्वविद्यालय का कोई कर्मचारी जिस दिन सेवानिवृत्त होगा, उसी दिन उसकी ग्रेच्युटी, पेंशन आदि देयकों का निस्तारण किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 20 हजार रुपये से कर्मचारी के लिए उपहार व जलपान की व्यवस्था की जाएगी। बैठक में प्रति कुलपति प्रो. अजय तनेजा, कुलसचिव संजीव कुमार सिंह, वित्त अधिकारी एके सिंह, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. रेखा रानी, अरविंद नारायण, अपर मुख्य सचिव के प्रतिनिधि के तौर डॉ. दिनेश कुमार की उपस्थिति रही।