ओडीओपी में शामिल किए गए आगरा के पेठा और जूता उद्योग को प्रदूषण के नाम पर बंद करने की जगह इन्हें विरासत मानते हुए बचाने की सिफारिश की गई है। काउंसिल फॉर साइंस एंड इंडस्टि्रयल रिसर्च तथा नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी अंतरिम रिपोर्ट दाखिल की है। नीरी ने विस्तृत रिपोर्ट के लिए समय और धन की मांग की है।
ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में गैर प्रदूषणकारी उद्योगों की परिभाषा स्पष्ट करते हुए नीरी ने अंतरिम रिपोर्ट दाखिल की है। इसमें नीरी ने सिफारिश की है कि ताजजमहल के ईको सिस्टम के संरक्षण के साथ प्रदूषण नहीं करने वाले छोटे उद्योगों की रक्षा की जाए। नीरी ने कहा कि गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों का मानदंड ऐसा होना चाहिए जो मानव स्वास्थ्य और स्मारक, दोनों की रक्षा करे। इसमें संगमरमर पर पच्चीकारी, चमड़े का काम, पेठा उद्योग, ढलाई आदि के काम को संरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। नीरी के मुताबिक नई तकनीक और स्वच्छ ईंधन जैसे प्राकृतिक गैस और बिजली के इस्तेमाल से प्रदूषण नियंत्रित हो सकता है।
कलर कोड की जगह विरासत आधारित मानदंड हों
नीरी ने कहा है कि उद्योगों को सफेद, हरा, नारंगी और लाल रंग में प्रदूषण के आधार पर बांटा गया है, लेकिन कलर कोड के किनारों पर विवाद की गुंजाइश है। प्रदूषण स्कोर में बदलाव करके सफेद श्रेणी के उद्योग को हरे रंग की श्रेणी में स्थानांतरित किया जा सकता है, जो मनमाना है। ऐसे में टीटीजेड में उद्योग की कलर कोड कैटेगरी की जगह विरासत मूल्य पर आधारित प्रदूषण मानदंड का उपयोग किया जाना चाहिए। टीटीजेड में गैर प्रदूषणकारी उद्योग की परिभाषा को पूरे देश में लागू करने की जरूरत नहीं है।
प्रदूषण रोकते हुए जारी रखी जाएं विरासत
नीरी के वैज्ञानिकों ने कहा कि विरासत के मूल्य को जीवित रखने के लिए ताजमहल के आसपास और टीटीजेड में छोटे पैमाने की गतिविधियों को संरक्षित किया जाए। जिससे चमड़े के जूते, पेठा, पत्थर जड़ाई, ढलाई, पुस्तक मुद्रण, मंदिरों के लिए देवी-देवताओं की पोशाक, साड़ी छपाई जैसी विरासत गतिविधियों को टीटीजेड के भीतर उनके संबंधित स्थानों पर बनाए रखा जा सके। इन उद्योगों को नई तकनीक और स्वच्छ ईंधन अपनाना होगा। जिन उद्योगों में सुधार नहीं हो सकता, केवल वही बंद किया जाएं।
नीरी ने मिस्र की दी मिसाल
नीरी ने विरासत और संस्कृति बचाने के लिए मिस्र की मिसाल दी है, जिसमें सहारा रेगिस्तान के खानाबदोशों बेडौइन के रीति-रिवाजों, संस्कृति को बचाने की याद दिलाई है। उनके उत्पाद खरीदने के लिए खरीदार को मिस्र आना पड़ता है। इससे उत्पाद बिक्री के साथ पर्यटन बढ़ता है। आगरा के मामले में पर्यटकों का आसान प्रबंधन और प्रदूषण न करने वाले लघु उद्योगों को संरक्षित करने की जरूरत बताई।