इसके अलावा शाही मस्जिद लोहामंडी, ताजमहल की शाही मस्जिद, मस्जिद कैथ, मस्जिद कलां समेत अन्य प्रमुख मस्जिदों में आठ से 10 नमाजियों को ही अलविदा की नमाज अदा करने का मौका मिल सका।
वहीं शहरभर में रोजेदारों ने अपने घरों में ही परिवारीजनों के साथ मिलकर जौहर की नमाज अदा की। शहर मुफ्ती ने अपने बयान में कहा था कि अलविदा की नमाज केवल मस्जिदों में ही अदा की जा सकती है। घरों में लोग केवल जौहर की नमाज ही अदा कर सकते हैं। लोगों ने अपने घरों में जौहर की नमाज अदा करके खुशहाली और अमनोअमान की दुआ मांगी।
नमाज घर पर पढ़ी
नई बस्ती के करम ईलाही ने बताया कि हमने सुबह से ही घरों में ही नमाज पढ़ने की तैयारी कर ली थी। सभी ने जौहर की नमाज के वक्त नमाज अदा की। हालांकि मौलाना ने कहा कि यह जुमा की नहीं बल्कि जौहर की नमाज कहलाएगी। लेकिन इसमें कोई हर्ज नहीं है।