बुढ़ापे में सबसे ज्यादा बीमारियां लोगों को घेर लेती हैं, ऐसे में मेडिक्लेम की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। इसलिए केंद्र सरकार पेंशनरों को मेडिक्लेम सुविधा देने का प्रस्ताव तैयार कर रही है। पेंशनरों को यह भरोसा दिलाया केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने। वे सोमवार को भाजपा नेता चौ. उदयभान सिंह के पश्चिमपुरी स्थित रेस्तरां के शुभारंभ के लिए आगरा आए हुए थे।
पेंशनरों की समस्याएं सुनने के बाद पीएमओ, पेंशन और लोक शिकायत राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में केंद्रीय कर्मचारियों से ज्यादा संख्या पेंशनरों की है। जबकि भारत को युवा देश बताया जा रहा है। इसलिए उनके अनुभव का लाभ लेने के लिए केंद्र सरकार दो प्रस्ताव तैयार कर रही है। रिटायरमेंट के बाद स्वैच्छिक और मानदेय पर पेंशनर अपने अनुभव सरकार को दे पाएंगे। केंद्र सरकार की कई कमेटियों का भी वह हिस्सा बनेंगे। कई विभागों में मेडिकल सुविधा पेंशनरों को दी जा रही है, लेकिन राज्य सरकारें ऐसी सुविधा नहीं दे रहीं। बता दें कि केंद्र सरकार 19 नवंबर 2014 से स्वास्थ्य सुविधा के लिए 500 रुपये प्रति माह पेंशनरों को दे रही है। जबकि राज्य सरकार के पेंशनरों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है।
केंद्रीय राज्यमंत्री का स्वागत
केंद्रीय राज्यमंत्री के आगरा आगमन पर रिटायर्ड ले. जनरल देवराज सिंह, गागन दास रामानी, कन्हैया लाल राठौर, जितेंद्र फौजदार, बलवीर सिंह कहरवार, दीपक खरे आदि ने स्वागत किया। राज्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर चुनाव में जिम्मेदारी संभालने और प्रभार वाली चारों सीटें जिताने के लिए चौ. उदयभान सिंह का आभार जताया।
रिटायरमेंट से पहले मिलेंगे पेपर
आगरा। केंद्रीय राज्यमंत्री ने बताया कि कर्मचारियों के रिटायर होने से पहले उन्हें पेंशन पेपर देने के निर्देश हैं। जो पेंशनर बुजुर्ग और आफिस आने में अशक्त हैं, उन्हें घर जाकर ही प्रमाण पत्र दिया जाएगा और हर साल जीवित प्रमाण पत्र जमा करने के लिए भी बैंक कर्मचारी या कोषागार कर्मचारी घर पर फार्म भरने पहुंचेंगे।
जम्मू कश्मीर सरकार पर नो कमेंट
जम्मू कश्मीर में उपमुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं और सरकार की भावी तस्वीर पर उन्होंने चुप्पी साध ली। कहा कि सरकार बनाने के लिए पार्टी ने जिन्हें अधिकृत किया है, वही जवाब दे पाएंगे। उत्तर पूर्व के विकास का प्रभार मिलने के बाद हर पखवाड़े केंद्र के आठ मंत्री नार्थ ईस्ट के राज्यों में प्रवास कर रहे हैं। हर राज्य में एक दिन सचिवालय लगाया जा रहा है, जिससे लोगों को महसूस हो कि दिल्ली उनके पास चलकर आई है।