नाई की मंडी क्षेत्र में बवाल के बाद शांति बहाल कराने के प्रशासन के प्रयास विफल हो गए। एक ही समुदाय के गिरफ्तार दो लोगों को न छोड़ने पर व्यापारियों ने चौकी डिवीजन में हुई बैठक का बहिष्कार कर दिया और उठकर चले गए। ऐलान किया कि दुकानें तभी खुलेंगी जब दोनों को छोड़ा जाएगा। जांच के बाद फैसला लेने पर अड़े पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने शाम को दोनों को छोड़ दिया। तर्क दिया कि उन्हें पूछताछ के लिए उठाया था।
मंगलवार पूर्वाह्न 11:30 बजे शुरू हुई बैठक में व्यापारियों ने पुलिस की एकतरफा कार्रवाई का विरोध किया। उनका कहना था कि मुकदमे में बुजुर्गों के नाम भी लिखा दिए हैं। बाजार कमेटी के मनीष अग्रवाल ने कहा कि वे लोग बाजार खोलने को तैयार थे, लेकिन पुलिस ने बवाल के मुकदमे में दो निर्दोष लोगों को पकड़ लिया। पूर्व पार्षद यामीन खां ने कहा कि बवाल करने वालों में नाई की मंडी के लोग शामिल नहीं थे। जुलूस पर पथराव मामले में हल्का मदान के लोगों का नाम लिखाया गया। पार्षद अनुज शर्मा ने कहा कि दोनों पक्ष शांति चाहते हैं। व्यापारी क्यों किसी से लड़ेगा। जहीरुद्दीन बाबर ने कहा कि कुक्कू गली और घेर काले खां के लोग गुनहगार नहीं हैं।
बवाल करने वालों को चिह्नित करना होगा। जब बाहर के लोग ईंट पत्थर फेंकेंगे तो लोग बचाव तो करेंगे ही। बच्चे दूध तक के लिए तरस रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि मुकदमे में किसी ने जानकार मोहल्ले के लोगों के नाम लिखवाए हैं। बैठक में नामजदगी की जांच करने, जुलूस का रूट बदलने की बात भी उठी। शब्बीर अब्बास ने कहा कि बाजार नहीं खोला जाएगा, जब तक कि दोनों लोगों को छोड़ा नहीं जाता। अधिकारियों ने दोनों व्यापारियों को जांच के बाद ही छोड़ने की बात कही, लेकिन व्यापारी नहीं माने। बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए। एडीएम सिटी राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि बवाल वाले दिन के फोटो और वीडियो से बलवाइयों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। देर शाम पुलिस ने हिरासत में लिए पीटी गुप्ता और हरेश डिश वाले को छोड़ दिया। सीओ ने कहा कि पूछताछ के लिए उन्हें उठाया गया था।
बैठक में ये रहे मौजूद
नवेंदु खंडेलवाल, दिनेश पचौरी, अजय जैन, संजय जैन, विशनचंद्र अग्रवाल, विशंभर बर्तन वाले, गोविंद बर्तन वाले, किशोर, बलवीर सिंह, अनिल गर्ग, आलोक जैन, राजकुमार गोयल, विकास अग्रवाल, फरीद अंसारी।