इनररिंग रोड और एडीए के लैंड पार्सल ( लैंड बैंक ) के लिए किए गए जमीन अधिग्रहण में बड़ा खेल सामने आया है। जांच में पाया गया है कि तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी/एसडीएम एत्मादपुर जेपी सिंह (वर्तमान में सिटी मजिस्ट्रेट, जालौन) ने पहले अधिगृहीत जमीन को एडीए के नाम दर्ज नहीं किया।
इसके बाद इसकी बिक्री हो जाने दी। इतना ही नहीं। जब अधिगृहीत जमीन का मुआवजा दिया गया, तो आबादी से दूर की जमीन को कागजों में नजदीक दर्शा दिया। इससे मुआवजा राशि बढ़ गई और शासन को राजस्व की हानि हुई। जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
एत्मादपुर के 20 गांवों की 938.897 हेक्टेयर भूमि का वर्ष 2011 में अधिग्रहण किया गया था। इसमें से रहनकलां और रायपुर में थीम पार्क योजना के लिए 232.9511 हेक्टेयर भूमि यूपीएसआईडीसी ने मांगी थी।
इसी अधिगृहीत जमीन में खेल किया गया। अधिग्रहण के बाद भी 2014 के आसपास कई बैनामा करा दिए। इस दौरान एसडीएम एत्मादपुर जेपी सिंह थे। उन्हीं पर एसएलओ का कार्यभार था। किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने इस संबंध में जिलाधिकारी के यहां शिकायत दर्ज कराई थी। जिसकी जांच एडीएम प्रशासन ने की।
इसमें वर्ष 2014-2015 में हुए सात बैनामों की जांच की गई। पता चला कि क्रेताओं ने तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय में तैनात अधिकारी व कर्मचारियों की मिलीभगत से किसानों को गुमराह कर भूमि का बैनामा करा लिया गया। बाद में इसी जमीन का सरकार से इसका अधिक प्रतिकर (मुआवजा) वसूला गया।
इससे कि शासन को राजस्व की हानि हुई। शासन को कितने राजस्व की हानि हुई है, जांच में इसका जिक्र नहीं है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि यदि सभी बैनामों की जांच कराई जाएगी तो करोड़ों के राजस्व क्षति का खुलासा हो सकता है।
एनजी रवि कुमार, जिलाधिकारी का कहना है कि लैंड पार्सल और इनररिंग रोड के जमीन अधिग्रहण के मामले में एडीएम प्रशासन के माध्यम से जांच कराई गई है। इसमें गड़बड़ी मिली है। मंडलायुक्त के माध्यम से इस रिपोर्ट को शासन को भेजा जाएगा। जो भी दोषी है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जेपी सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट, जालौन (तत्कालीन एसएलओ) का कहना है कि एकतरफा जांच की गई है। मेरा पक्ष नहीं लिया गया है। मैंने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी के यहां आवेदन देकर अपना पक्ष रखने की मांग की है।