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यमुना में अद्भुत दृश्य: हजारों दीयों की रोशनी से जगमगाया पार्वती घाट, बैकुंठ चतुर्दशी पर हुआ दीपदान

Wed, 05 Nov 2025 09:54 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

बैकुंठ चतुर्दशी पर सैकड़ों महिलाओं ने दीपदान किया। इस दौरान यमुना में अद्भुत दृश्य दिखाई दिया। मान्यता है इस दिन दीपदान करने से बैकुंठ का मार्ग प्रशस्त होता है।
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यमुना में दीपदान - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा में बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर बल्केश्वर के पार्वती घाट की अलाैकिक छटा नजर आई। मान्यता है इस दिन दीपदान करने से बैकुंठ का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी भावना के साथ मंगलवार को बल्केश्वर के पार्वती घाट पर सैकड़ों महिलाओं ने यमुना मैया की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की और दीपदान किया। हजारों दीयों की रोशनी से पार्वती घाट जगमगा उठा।
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बैकुंठ चतुर्दशी पर बल्केश्वर के पार्वती घाट का दृश्य अन्य दिनों की अपेक्षा बिल्कुल अलग दिखाई दिया। दोपहर से ही महिलाओं का घाट पर आना शुरू हो गया था। महिलाएं घर से दीपक बनाकर लाई थीं। महिलाओं ने यमुना मैया की विधि-विधान से आरती उतारी और दीपदान कर बैकुंठ चतुर्दशी मनाई। घाट पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने हजारों दीयों को यमुना में प्रवाहित कर प्रभु श्रीहरि विष्णु और भगवान शिव से प्रार्थना की। दीयों की रोशनी से यमुना मैया रोशन हो गई।

नदी में झिलमिलाते दीप आसमान से उतरे तारों की तरह प्रतीत हो रहे थे। घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्घालुओं की भीड़ रही। महिलाओं के साथ बच्चों ने भी दीपदान किया। कार्तिक मास में यमुना में स्नान करने और दीपदान करने से यमराज की बहन यमुना का आशीर्वाद मिलता है, जिससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, इसलिए कार्तिक मास में लोग प्रतिदिन यमुना घाट पर दीपदान करते हैं।
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दीपदान से खुलता है बैकुंठ का मार्ग
नटराज पुरम निवासी अमिता अग्रवाल ने बताया कि कार्तिक मास में हम प्रतिदिन तुलसी माता के समक्ष दीप जलाते है। आज 32 दीपक जलाकर यमुना मैया को अर्पित किए हैं। मान्यता है कि आज के दिन दीपदान करने से बैकुंठ का मार्ग प्रशस्त होता है।


अलग-अलग प्रकार के जलाते हैं दीप
कमला नगर निवासी बरखा बंसल ने बताया कि बैकुंठ चतुर्दशी पर अलग-अलग प्रकार के दीपक जलाकर यमुना में प्रवाहित करते हैं। आज हमने सखियों के साथ मिलकर 365 तारों से आटे का दीपक तैयार कर यमुना मैया को अर्पित किया है। 


32 दीपक का विशेष महत्व
बल्केश्वर निवासी कविता गर्ग का कहना है कि सनातन धर्म में कार्तिक मास की बैकुंठ चतुर्दशी को 32 दीपक जलाने का विशेष महत्व है। जो प्रतिदिन दीपक नहीं जला पाते है वो आज के दिन 32 दीपक जलाकर यमुना में प्रवाहित करें तो पूरे मास की सेवा का फल प्राप्त होता है। कुछ महिलाएं यमुना में 32 दीये प्रवाहित करती हैं। 
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