उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में चुनावी रण में जंग जीतने के लिए राजनीतिक दल सेनापति बदल रहे हैं। आगरा में सपा ने और मथुरा में बसपा ने पहले ही उम्मीदवार बदल दिया था। तीन दिन पहले सपा ने बदायूं से प्रत्याशी बदल दिया। मंगलवार को बसपा ने मैनपुरी और बुधवार को फिरोजाबाद सीट से उम्मीदवार बदल कर सभी को चौंका दिया।
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चुनावी मैदान में इसे जंग जीतने की कवायद कहें या वोटों के ध्रुवीकरण का खेल। सियासी दल अपने अंदाज से सियासत साध रहे हैं। जाति में बंटे मतदाता राजनीतिक दलों की चाल समझने की कोशिश कर रहे हैं। सपा के गढ़ मैनपुरी और फिरोजाबाद में बसपा का नया दांव सियासत की बदली हवा की ओर इशारा कर रहा है। जानकार समझ रहे हैं खेल क्या है...।
मथुरा से पहले बहुजन समाज पार्टी ने कमल कांत उपमन्यु को प्रत्याशी घोषित किया था। नामांकन की तिथि पास आते-आते बसपा ने उपमन्यु का टिकट काट दिया और रिटायर्ड आरईएस अधिकारी सुरेश सिंह को टिकट दे दिया। मंगलवार को बसपा ने मैनपुरी से डॉ. गुलशन देव शाक्य का टिकट काट कर सभी को चौंका दिया।
मुलायम के गढ़ में सपा का किला ढहाने के लिए बसपा ने शाक्य दांव चला था। यहां से राजनीति में नवोदित चेहरे डॉ. गुलशन देव शाक्य को उम्मीदवार बनाया था। गुलशन अपनी सियासी दुकान जमा पाते उससे पहले बसपा ने उनका पत्ता काट दिया। नामांकन से पहले बसपा ने उनका टिकट काटकर शिवप्रसाद यादव को टिकट दे दिया है।
सपा के गढ़ में बसपा का यादव पर दांव राजनीतिक पंडितों की समझ में नहीं आ रहा है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि मैनपुरी में आज भी यादव वोटों पर सपा की ही पकड़ है। इस वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए भाजपा ने अपने चुनावी प्रचार की शुरुआत मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को बुलाकर की।
मुलायम के गढ़ में पहली बार मोहन यादव आए तो सियासत साधने के नए संकेत दे गए। अब बसपा ने भी शाक्य का टिकट काटकर यादव उम्मीदवार उतार दिया है। यादव वोट में सेंधमारी का यह दांव माना जा रहा है। उधर टिकट कट जाने से नाराज डॉ. गुलशन देव शाक्य तुरंत समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। अब शाक्य वोट किधर जाएगा इस पर सब की नजर है। वैसे बसपा का प्रत्याशी बदले जाने से अंदरखाने भाजपा काफी खुश है।
ऐन वक्त पर फिरोजाबाद में बसपा ने खेला मुस्लिम कार्ड
बसपा ने फिरोजाबाद में भी ऐसा ही किया। नामांकन से पहले यहां भी प्रत्याशी बदल दिया। सत्येंद्र जैन सौली को उम्मीदवार बनाकर बसपा ने वैश्य कार्ड खेला था। जैसे ही भाजपा के प्रत्याशी की घोषणा हुई बसपा ने बुधवार को सौली को मैदान से हटाकर पूर्व मंत्री चौधरी बशीर को मैदान में उतार दिया। चौधरी बशीर बसपा की सरकार में मंत्री रह चुके हैं। 2019 में फिरोजाबाद सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े थे।
बशीर को मैदान में लाकर बसपा ने सपा के गणित को बिगाड़ दिया है। मुस्लिम वोटों की गोलबंदी के बीच चौधरी बशीर के आने इस सीट पर सियासत के नए समीकरण उभर सकते हैं। सौली भी राजनीति में नया चेहरा थे। कई महीनों से नीला झंडा थामें वह पार्टी के लिए जमीन तैयार कर रहे थे लेकिन ऐन वक्त पर उन्हें मैदान से हटाकर बसपा ने कई संकेत दे दिए। राजनीति के जानकार इसे शह-मात के खेल के साथ बसपा का पुराना पैंतरा भी मान रहे हैं।
बदायूं में शिवपाल का दांव या दबाव
बदायूं में समाजवादी पार्टी में पहले शिवपाल यादव को टिकट दिया था। शिवपाल यादव का शुरू से चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं थे। शिवपाल यादव चाहते थे कि किसी तरह उनके पुत्र आदित्य यादव राजनीति में सेट हो जाएं और वह इस बात पर अड़े थे कि बदायूं से उनके स्थान पर आदित्य यादव को टिकट दे दिया जाए। समाजवादी पार्टी ने शिवपाल की नाराजगी को दूर करने का पासा फेंका और आदित्य यादव को बदायूं से प्रत्याशी घोषित कर दिया।
आगरा से सपा पहले ही उम्मीदवार बदल चुकी है। यहां से सुरेश चंद कदम को सपा ने टिकट दिया है। बदायूं से सपा धमेंद्र यादव का टिकट पहले ही काट चुकी थी। शिवपाल तो सियासत में पुराना चेहरा हैं और वर्तमान में विधायक भी हैं। वह अपने बेटे के लिए सियासी जमीन तैयारी कर रहे थे। यही वजह है उन्हें मौका मिला तो अपनी जगह बेटे को सेट कर दिया। शिवपाल का यह दांव पार्टी पर दबाव भी माना जा रहा है।
फिरोजाबाद में भाजपा ने फिर चौंकाया
फिरोजाबाद में मौजूदा सांसद डॉ. चंद्रसेन जादौंन का टिकट काट कर भाजपा ने विश्वदीप सिंह को दे दिया है। भाजपा ने यहां टिकट देने में सिर्फ चेहरा बदला है जाति का दांव पुराना ही है। विश्वदीप बसपा से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। भाजपा उनके लिए नया ठिकाना ही है। चूड़ियों के शहर में दावेदारी में जितने नाम चल रहे थे, उनको किनारे कर भाजपा के नए चेहरे पर दांव की सियासत समझने की कोशिश पार्टी के पदाधिकारियों से लेकर कार्यकर्ता तक कर रहे हैं।
वैसे सुहाग नगरी की धरती पर आम जनता के लिए नाम चौंकाने वाला इस लिए है क्योंकि दावेदारों की सुर्खियों में विश्वदीप सिंह नाम कहीं नहीं था। प्रत्याशी की घोषणा होते ही चौंके भाजपा के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर अपने-अपने तरीके से प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया।