आगरा में विदेशी तोते के मालिकाना हक को लेकर दो पक्षों में हुआ विवाद थाने पहुंच गया। पुलिस ने दोनों पक्षों की पूरी बात तो सुन ली, लेकिन ये निर्धारित नहीं हो पा रहा था कि तोते का असली मालिक आखिर कौन है। करीब तीन घंटे तक थाने में इस बात को लेकर बहस चलती रही। अंत में जब पुलिस हार गई, तो इस मामले को खुद तोते ने ही सुलझा दिया।
आगरा के थाना कमला नगर के बल्केश्वर में एक परिवार तीन साल से एक विदेशी तोते को पाल रहा था। इसलिए परिवार के लोगों का तोते से गहरा लगाव हो गया। अचानक शनिवार को वो युवक घर पर आ गया, जिससे इस तोते को लिया था। युवक ने इस परिवार से तोते को वापस मांगा। इस पर परिवार के लोगों ने तोता देने ने मना कर दिया। तोते को लेकर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस तोते के साथ दोनों पक्षों को लेकर थाने आ गई।
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अब पुलिस भी इस उलझन में पड़ गई कि तोते का असली मालिक कौन है? तोता पालने वाले को दिया जाए या मुफ्त में देने वाले को दिया जाए। पुलिस भी यह फैसला नहीं कर पाई। इसके बाद थानाध्यक्ष विपिन कुमार गौतम ने ये फैसला तोते पर ही छोड़ दिया। दोनों पक्षों से कहा गया कि तोता जिस ओर जाएगा और जिसे पहचानेगा, तोता उसी को दिया जाएगा। इसके बाद एक मेज पर तोते को छोड़ा गया। दोनों पक्षों को सामने खड़ा किया गया।
तोते के पिंजड़े से बाहर आते ही दोनों पक्षों धड़कन बढ़ने लगीं और तोता आगे बढ़ते हुए उस पक्ष की ओर चला गया जो उसे तीन साल से पाल रहा था। तोता अपनी भाषा में मालकिन को मम्मी और मालिक को पापा बोलने लगा। इसके बाद पुलिस ने तोते को पालने वाले पक्ष के सुपुर्द कर दिया।