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UP: इतिहास की किताब 560 रुपये, अंग्रेजी की बुक हुई इतनी महंगी; बच्चों के नए कोर्स का रेट उड़ा देगा होश

Tue, 24 Mar 2026 09:48 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

किताबों के साथ कॉपियों के नाम पर भी अभिभावकों से ज्यादा कीमत वसूली जा रही है, कम पन्नों की कॉपियां महंगे दाम पर बेची जा रही हैं। स्कूलों की मिलीभगत से तय दुकानों से ही खरीदारी की मजबूरी ने अभिभावकों पर आर्थिक बोझ और बढ़ा दिया है।

 
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माहेश्वरी बुक डिपो पर प्रदर्शन किया - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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बच्चों को पढ़ाना आसान नहीं है। एक ओर आसमान छूती किताबों की कीमतें अभिभावकों को दिन में तारे दिखा रहीं हैं तो वहीं दूसरी ओर कॉपियों के नाम पर भी अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। अधिकतम खुदरा मूल्य पर किताबों की बिक्री के साथ पुस्तक विक्रेता कॉपियों के दाम और पन्नों में भी कालाबाजारी कर रहे हैं। कम पन्ने की कॉपियों को अधिक कीमत का टैग लगाकर बेचा जा रहा है, जिससे अभिभावकों पर दोहरी मार पड़ रही है।
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सोमवार से शहर के कई अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में नए सत्र की पढ़ाई शुरू हो गई। इसी के साथ अभिभावकों के लिए तय दुकान से किताब खरीदना भी मजबूरी बन गया है। माहेश्वरी बुक डिपो से किताब-कॉपियां खरीदकर लाए अभिभावक ने अमर उजाला को कॉपियों की रेट लिस्ट का फोटो भेजा। 200 पेज की कॉपी के अभिभावक से 90 रुपये वसूले गए। घर पहुंचने पर जब किताब-कॉपी के सेट को खोला गया तो उसमें कॉपी पर रेट स्लिप ऊपर से लगाई गई थी। जब इस रेट स्लिप को हटाया गया तो पेजों की संख्या 164 और मूल्य 70 रुपये अंकित था। इस प्रकार अभिभावकों की जेब पर कीमत बढ़ा और पन्ने कम कर डबल डाका डाला जा रहा है।
 
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कक्षा से तीन गुनी किताबें
शहर के प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा की संख्या की तुलना में तीन गुनी तक किताबें लगाई गई हैं। कक्षा 6 में किताबों की संख्या 18 तक है। इसमें कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग, कोडिंग और वर्कबुक शामिल है। इसी प्रकार अंग्रेजी में साहित्य, भाषा के साथ नॉवेल लगाई गई है। हिंदी साहित्य, भाषा के साथ संस्कृत की अलग से किताब लगभग सभी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में लगाई गई हैं। कक्षा 6 के बच्चों के लिए एक किताब में विज्ञान की शाखा (फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी) की अलग-अलग किताबें लगाई गई हैं। इसी प्रकार इतिहास के साथ नागरिक शास्त्र की एक और भूगोल की अलग दो किताबें लगाई गई हैं। जबकि केंद्रीय विद्यालयों में इन विषयों को एक ही किताब से पढ़ाया जाता है।

 

अधिकतम खुदरा मूल्य पर बेच रहे हैं विक्रेता किताबें
अमूमन बाजार से कोई भी किताब खरीदने पर विक्रेता 10 से 15 प्रतिशत तक डिस्काउंट बिना कहे देते हैं और अगर किताबों की संख्या अधिक हो तो डिस्काउंट भी बढ़कर 20 से 25 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। मिलीभगत के चलते स्कूल एक ही विक्रेता को अधिकृत करते हैं। ऐसे में अभिभावकों को अधिकतम खुदरा मूल्य पर किताबें खरीदनी पड़ती हैं। कोई अभिभावक कॉपियां न लेना चाहें तो विक्रेता किताबें देने से भी इन्कार कर देते हैं।

 

हर कक्षा के लिए अलग विक्रेता
अभिभावक बरखा का कहना है कि हर साल किताबें बदल देते हैं, कम से कम पांच साल तक किताबें नहीं बदली जानी चाहिए। ज्यादातर किताबें 350 रुपये से अधिक कीमत वाली हैं। 20 किताबें हैं। यह बच्चों और अभिभावकों दोनों के साथ ज्यादती है।
 
 

नहीं बदली जानी चाहिए किताबें
अभिभावक भावना ने बताया कि हर साल किताबें क्यों बदल दी जाती हैं। कोविड के बाद से स्कूलों ने बुक सेट इतने महंगे कर दिए हैं, जिससे घर का बजट ही बिगड़ जाता है। किताबें न बदलें तो यह राहत भी कम नहीं है।

 

आठवीं कक्षा में लगाई है सुलेख की किताब
शहर के एक स्कूल ने कक्षा 8 में हिंदी और अंग्रेजी की सुलेख की किताब लगाई है। जिनकी कीमत 175 और 180 रुपये हैं। एक अन्य विद्यालय की अंग्रेजी की किताब की कीमत 620 रुपये हैं। पन्नों का गणित लगाएं तो 136 पेज वाली इस किताब के हर पन्ने की कीमत करीब 4.50 रुपये बैठती है। जबकि पेपर की गुणवत्ता, छपाई और चित्र आदि सामान्य स्तर के ही हैं। किसी भी विषय की किताब और कॉपी के पन्ने की कीमत औसतन 2 रुपये से कम नहीं है।

 
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विषय कीमत पेज            प्रति पेज कीमत
अंग्रेजी 620 136 4.55 रुपये

इतिहास 560 152 3.68 रुपये
गणित 550 344            1.59 रुपये

कंप्यूटर 540 136            3.97 रुपये
ज्योग्राफी 475 104            4.56 रुपये

हिंदी 460 148 3.10 रुपये
संस्कृत 340 108 3.14 रुपये
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