माल रोड पर स्थित प्रतापपुरा प्रधान डाकघर में रोजाना करीब 300 से ज्यादा उपभोक्ता डाक से संबंधित कार्यों के लिए आते हैं। इसके साथ ही यहां काम करने वाले करीब 80 कर्मचारी भी हैं। जो सुबह से शाम तक यहां बैठकर काम करते हैं। बरसात के मौसम में सीलन के चलते प्लास्टर गिरने का खतरा और बढ़ गया है।
हालत ये हैं कि कर्मचारी और उपभोक्ताओं की एक नजर काम पर और दूसरी छत पर रहती है। डाकघर में कई स्थानों पर प्लास्टर गिरने से सरिया तक निकल आई हैं। इसके अलावा कई जगह प्लास्टर गिरासु है। छत से गिरते हुए प्लास्टर को रोकने के लिए डाक विभाग ने नेट लगा दिया है। लेकिन ये नेट प्लास्टर के बड़े टुकड़े से बचाव के लिए नाकाफी है।
112 साल पुराना है डाकघर
प्रतापपुरा डाकघर शहर का सबसे पुराना डाकघर है। इसकी स्थापना 1913 में ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी। डाकघर को करीब 112 साल बीत चुके हैं। यह देश के उन गिने-चुने डाकघरों में से एक है जो एक शताब्दी बाद भी प्रयोग में हैं।
मरम्मत को भेजा है प्रस्ताव
प्रतापपुरा प्रधान डाकघर के प्रवर डाकपाल शशिकांत ने बताया कि छत की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही काम शुरू करा दिया जाएगा। गिरते प्लास्टर से बचाव के लिए नेट लगा रखा है।