इससे पूर्व 1975 में सूर पदावली के एलपी रिकॉर्ड का विमोचन भी उन्होंने जयसिंह घेरा पर ही किया था। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय कलाकार मौजूद रहे। श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि सोमवार को उनकी बेटी का फोन आया कि अमेरिका में पंडित जी ने अपना शरीर त्याग दिया है।
90 वर्षीय पंडित जसराज का निधन अमेरिका के न्यूजर्सी में हुआ। पंडित जसराज का सबसे बड़ा योगदान शास्त्रीय संगीत को जनता के लिए सरल और सहज बनाना रहा जिससे उसकी लोकप्रियता बढ़ी। उन्होंने ख्याल गायकी में ठुमरी का पुट डाला जो सुनने वालों के कानों में मिसरी घोल जाता था। वह बंदिश भी अपने जसरंगी अंदाज में गाते थे ।
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