सोरोंजी। तीर्थनगरी में ब्राह्मण कल्याण सभा की बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रत्येक एकादशी को लगाई जाने वाली शूकरक्षेत्र की पंचकोसी परिक्रमा पर चर्चा की गई। बताया गया कि 6 फरवरी को सुबह 9 बजे वराह मंदिर से प्रारंभ होगी। इस एकादशी को शटतिला एकादशी भी कहा जाता है। परिक्रमा शुरू होने से पहले श्रद्धालु हरि की पौड़ी में गंगा स्नान कर भगवान वराह मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे।परिक्रमा संयोजक शरद पांडेय ने कहा कि माघ मास की यह एकादशी शटतिला एकादशी कहलाती है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 6 फरवरी को उदयातिथि में होगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार एकादशी पूरे दिन मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु (भगवान वराह) के साथ-साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। तिल के दान का इस दिन विशेष विधान है। एकादशी तिथि का व्रत रखने से विशेष कार्यों में सफलता भी मिलती है। इसलिए भक्त श्रद्धापूर्वक एकादशी की तिथि पर लक्ष्मी-नारायण की पूजा करते हैं। पद्म पुराण में वर्णित है कि तिलों के बोने पर उनसे जितनी शाखाएं पैदा होती हैं। उतने हजार वर्षों तक दान करने वाला व्यक्ति स्वर्गलोक में प्रतिष्ठित होता है। यह व्रत करने से मनुष्य की आध्यात्मिक उन्नति होती है और सभी प्रकार के पापों से मुक्ति प्राप्त होती है।