चाहे मारपीट हो, खून खराबा हो या छेड़छाड़ और बलात्कार की घटनाएं। ओढ़ मुसलमान न तो थाने जाते हैं और न कोर्ट कचहरी के चक्कर में पड़ते हैं। साल भर में एक बार बैठनेे वाली पंचायत में सभी मामले सुने जाते हैं। इसमें गुण दोष के आधार पर फैसला सुनाया जाता है। यही सबको मंजूर होता है। शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक बटेश्वर मेले में ओढ़ समाज की पंचायत बैठी। इसमें गढ़मुक्तेश्वर के हाजी फजल सरपंच बने। पंचायत में दो दर्जन मामले निपटाए गए। जो मामले रह गये उनका फैसला धौलपुर और हरदोई की पंचायत में होगा।
शनिवार सुबह 10 बजे तक चली पंचायत में छेड़छाड़, मारपीट, जमीन बंटवारे और संघर्ष समेत अन्य कई प्रकार के मामले शामिल रहे। जालौन की युवती के साथ छेड़छाड़ के मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद सरपंच ने उनकी शादी कराने का फैसला सुना दिया। झांसी के अहमद खां और मोहम्मद खां के बीच 20 साल से चले आ रहे जमीन के विवाद के मामले में जमीन बंटवारे का फैसला हुआ। इस पर दोनों भाई एक दूसरे के गले मिलकर रो पड़े। कानपुर के दो पक्षों के बीच हुई मारपीट में आठ लोग घायल हुये थे। दोनों पक्षों के हनीफ और सुभान खां ने अपनी बात रखी। मामला सुनने के बाद सरपंच हाजी फजल ने दोबारा न लड़ने की शपथ दिलाई। इसी तरह लगभग दो दर्जन मामले सुने गये। इस दौरान सभी को अपनी बात रखने का मौका दिया गया और सामाजिक बहस कराई गई। इस दौरान जो मामले रह गये उन्हें धौलपुर और हरदोई के पाली में बैठने वाली पंचायत में सुना जायेगा। पंचायत में राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात के अलावा यूपी के झांसी, जालौन, हमीरपुर, बांदा, कानपुर, महोबा, गाजियाबाद, उरई के लोगों ने शिरकत की। इस दौरान रघुवीर, सामत खांन, शान मोहम्मद, साधू खां, हाजी हनीफ, हाजी सलमान आदि मौजूद रहे।
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ओढ़ मुस्लिम समाज में पंचायत की परंपरा सदियों पुरानी है। आपसी सुलह से मसले निपटाये जाते हैं। समाज के लोग न तो थाने जाते हैं और न कोर्ट कचहरी के चक्कर में पड़ते हैं। सजा के तौर पर रोटी बेटी का संबंध तोड़ने, हुक्कापानी बंद करने और सामाजिक बहिष्कार जैसे फैसले सुनाये जाते हैं।
- हाजी फजल, सरपंच, पंचायत