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Agra News: 20 हजार रजिस्ट्री आयकर रडार पर, बिना पैन 10 लाख से ज्यादा के सौदे उजागर

Mon, 29 Dec 2025 08:46 AM IST
आगरा ब्यूरो अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आयकर विभाग के पास ऐसी रजिस्ट्री कराने वालों की जानकारी न पहुंचने पर आयकर अधिकारी रजिस्ट्रीकर्ताओं की स्क्रूटनी में जुटे हैं। देखा जा रहा है कि कहीं लोग कर चोरी के लिए तो ऐसा नहीं कर रहे हैं।
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आगरा सदर तहसील निबन्धन भवन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) लगाए बिना 10 लाख रुपये से ज्यादा की करीब 20 हजार रजिस्ट्री आयकर विभाग की रडार पर हैं। पिछले पांच साल में सब रजिस्ट्रार कार्यालयों (एसआरओ) से आयकर विभाग के पास ऐसी रजिस्ट्री कराने वालों की जानकारी न पहुंचने पर आयकर अधिकारी रजिस्ट्रीकर्ताओं की स्क्रूटनी में जुटे हैं। देखा जा रहा है कि कहीं लोग कर चोरी के लिए तो ऐसा नहीं कर रहे हैं।
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शुरुआती जांच में कई नामी बिल्डरों व कारोबारियों पर बड़ी कर चोरी के संकेत मिलने के बाद विभाग ने जांच तेज कर दी है। रजिस्ट्री कार्यालयों के अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी शक के दायरे में है। हाल ही में आयकर विभाग की टीमों ने पहले किरावली फिर सदर तहसील स्थित एसआरओ में सर्वे किया था। सदर से तो विभाग को बिना पैन नंबर लगाए की गई 10 लाख से ज्यादा की एक भी रजिस्ट्री का ब्योरा वित्तीय वर्ष 2019-20 से नहीं भेजा था।

खास बात यह है कि साल 2019 के बाद से ही शहर का विस्तार और विस्तारित क्षेत्र में टाउनशिप, प्लॉटिंग, काॅलोनियां विकसित होना शुरू हुईं। ऐसे में इस मियाद के बाद बड़ी संख्या में रजिस्ट्री हुईं। विभागीय सूत्रों ने बताया कि शुरुआती जांच में कर चोरी के लिए पैन नंबर न लगाने के संकेत मिले हैं। बड़ी संख्या में जमीनें बेचने वाले बिल्डरों के भी पैन नंबर दर्ज नहीं है। विभाग को कुछ ऐसे मामलों में पैन नंबर मिल चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि रजिस्ट्री कार्यालयों से जानकारी मिलने और सिस्टम में अपलोड होने पर कई दिग्गज कारोबारी, बिल्डर और जमीन खरीदने वाले चिह्नित हो जाएंगे और उसके बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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क्या है नियम
नियमानुसार रजिस्ट्री कराते समय पैन नंबर लगाना होता है। न होने पर फॉर्म 60 भरा जाता है। फिर फॉर्म 61 भरकर यह घोषणा करनी होती है कि उनकी आय का साधन केवल कृषि है। एसआरओ को बिना पैन नंबर वाली 10 लाख से ज्यादा कीमत के ऐसे लेन-देन का ब्योरा फॉर्म 61ए को भरकर आयकर विभाग को देता है। इसके बाद विभाग सिस्टम के जरिये रैंडम आधार पर पता करता है कि लोगों के पैन हैं या नहीं। हालांकि अब तक की जांच में ऐसी एक भी रिपोर्टिंग नहीं मिली है।
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