श्रीलंका में संकट से फिरोजाबाद के पांच करोड़ के आर्डर फंसे
धार्मिक व सांस्कृतिक पर्व पर बिकने वाले हैंडीक्रॉफ्ट और फैंसी आयटम के आर्डर व भुगतान लटके
दिलीप शर्मा
फिरोजाबाद। पड़ोसी देश श्रीलंका में चल रहे राजनीतिक संकट के कारण जिले के कांच आयटमों के निर्यातक खासे परेशान हैं। जुलाई से लेकर सितंबर-अक्तूबर तक श्रीलंका में तमाम धार्मिक, पारंपरिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहती है। इन त्योहारों पर बिकने वाली देवी-देवताओं की मूर्तियां, खेल-खिलौना, लाइटिंग आयटम आदि का आर्डर लेने वाले जिले के हस्तशिल्पी और निर्यातकों के करीब पांच करोड़ रुपये के आर्डर फंस गए हैं। कांच कारोबार से जुड़े निर्यातकों की मानें तो मार्च-अप्रैल में भेजे गए माल के भुगतान की भी चिंता सता रही है।
श्रीलंका में जून-जुलाई में पॉसन फेस्टिवल, जुलाई-अगस्त में वेल फेस्टिवल, जुलाई-अगस्त में एसाला और अगस्त-सितंबर में नल्लूर महोत्सव की धूम रहती है। वहीं अक्तूबर-नवंबर में दीपावली का त्योहार भी धूमधाम से मनाया जाता है। इन त्योहारों व सांस्कृतिक महोत्सव में चीन और भारत में निर्मित कांच के आयटमों की भारी मांग रहती है। जहां कोरोना के कारण श्रीलंकाई कारोबारी चीन से माल आयात करने से कतरा रहे हैं। वहीं श्रीलंका के वर्तमान हालात को देखते हुए फिरोजाबाद के कांच निर्यातक ने हैदराबाद, तमिलनाडु आदि राज्यों में बैठे बिचौलिया कारोबारियों के जरिए करोड़ों रुपये के आर्डर हासिल किए थे। इनको पूरा कराने में जुटे फिरोजाबाद के कांच निर्यातकों की चिंता श्रीलंका मे गत दिनों अचानक तेज हुए राजनीतिक संकट ने बढ़ा दी है। कई माह पूर्व माल भेज चुके कारोबारी भी भुगतान को लेकर चिंतित हैं। पड़ोसी देश में कांच आयटम की सप्लाई करने वाले कारोबारियों की माने तो करीब पांच करोड़ रुपये के आर्डर फंस गए हैं। वहीं दो से तीन करोड़ रुपये का भुगतान बिचौलियों के जरिए अधर में लटक गया है। (संवाद)
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श्रीलंका के प्रमुख त्योहार एवं बिकने वाले कांच आयटम
- पॉसन फेस्टिवल जून-जुलाई भगवान बुद्ध और अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां
- वेल फेस्टिवल जुलाई-अगस्त बौद्ध एवं हिंदू देवी-देवताओं की मूर्ति, हैगिंग लाइट, कांच के दीपक
- एसाला अगस्त कांच के मोती वाली माला,रंग-बिरंगे कांच के नग
- नल्लूर महोत्सव अगस्त-सितंबर कांच मूर्तियां,फैंसी ग्लास आयटम, लाइटें, लालटेन, किचिन वेयर
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कांच कारोबारियों की बात
कोविड काल से ही चीन का आवागमन बंद है। कांच के हस्तशिल्प आयटम और फैंसी ग्लास की बिक्री के लिए श्रीलंका से काफी उम्मीद थीं। कोराना काल के बाद स्थानीय त्योहारों पर कांच की मूर्तियां व किचन वेयर की डिमांड की उम्मीद थी। ताजा हालात ने कांच व अन्य कारोबारियों को निराश कर दिया है। लगभग पांच करोड़ का कांच कारोबार प्रभावित होगा।
हेमंत अग्रवाल बल्लू अध्यक्ष लघु उद्योग भारती
कारोबारी दृष्टिकोण से श्रीलंका के हालात पहले से ही खराब थे। श्रीलंका में मनाए जाने वाले कई त्योहार हिंदू रीति-रिवाजों से मेल खाते हैं। ऐसे में फैंसी ग्लास, किचन वेयर के साथ धार्मिक त्योहारों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां व लाइट का सामान एक्सपोर्ट हो रहा था। लेकिन अब सबकुछ ठप हो जाना तय है। कई कांच कारोबारियों की रकम भी फंसेगी।
संदीप चतुर्वेदी अध्यक्ष ग्लास बिजनेस मैन एसोसिएशन