जूता मजदूर हों या फाउंड्री मजदूर या फिर मार्बल पच्चेकार, दिहाड़ी नगदी की जगह बैंक खातों में ही पहुंचेगी। नोटबंदी के बाद नगदी के संकट को देखते हुए बैंक, पीएफ आफिस और प्रतिष्ठान मिलकर संगठित और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के बैंक खाते खुलवा रहे हैं। महज चार दिनों में ही कैंप लगाकर 24 हजार से ज्यादा खाते खोले जा चुके हैं। इनमें जूता कारीगरों की संख्या सबसे ज्यादा है।
श्रम मंत्रालय के निर्देश के बाद बैंकों ने हर दिन कैंप लगाकर मजदूरों के खाते खोलने पर फोकस किया है। सिकंदरा, फाउंड्री नगर, यूपीएसआईडीसी, नुनिहाई, शास्त्रीपुरम्, बोदला में सबसे ज्यादा कैंप लगाए गए हैं। दिसंबर की शुरुआत होने पर मासिक वेतन देने के लिए फैक्ट्री संचालक परेशान थे, लेकिन अब खाते खुलने से उनकी कैश में वेतन देने की मुश्किल दूर हो जाएगी। बैंकों का अनुमान है कि आगरा में असंगठित क्षेत्र में 1.25 लाख बैंक खाते खुल जाएंगे।
आधार कार्ड बनाने के साथ खुला खाता
आगरा। बैंक आफ इंडिया ने पावर ग्रिड कारपोरेशन शमसाबाद रोड स्थित 765 केवी सबस्टेशन पर शिविर लगाया। इसमें जीपीटी, केपीएस और मोहन एनर्जी यूनिट के कर्मचारियों के 350 बैंक एकाउंट खोले गए। जिनके पास आधार कार्ड नहीं था, उनके कार्ड भी बनाए गए और खाते भी खोले गए। जिनके पास आधार कार्ड था, उनका बैंक खाता बायोमेट्रिक तरीके से चंद मिनट में ही खोल दिया गया। पावर ग्रिड के जीएम राकेश कुमार, एजीएम फाइनेंस एलआर गोयल, किशोर सोलंकी, बैंक आफ इंडिया से अधिकारी अभय कुमार, अमरदीप कौशिक, राजकुमार, अशोक यादव और रफीक अब्बास मौजूद रहे।
कैंप में दनादन खोले जा रहे एकाउंट
पहले दिन 6500
दूसरे दिन 7500
तीसरे दिन 4019
पांचवे दिन 5500
कैश की कमी है और निकासी की लिमिट भी कम है। ऐसे में वेतन के लिए एकाउंट ज्यादा से ज्यादा संख्या में खोले जा रहे हैं। हम हर फैक्ट्री, हर प्रतिष्ठान के हजारों मजदूरों के एकाउंट खोलने का प्रयास कर रहे हैं ताकि उन्हें समय पर वेतन मिल जाए।
पंकज सक्सेना, लीड बैंक मैनेजर