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आगरा न्यूज: खुले नाले छीन रहे जिंदगी, ढकने के लिए अदालत का आसरा; एक्टिविस्ट तैयार कर रहे ब्योरा

Tue, 08 Sep 2026 10:14 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में खुले नालों में लगातार हो रहे हादसों के बाद पर्यावरणविद और एक्टिविस्ट नगर निगम के खिलाफ अदालत जाने की तैयारी कर रहे हैं। एक माह में तीन मौतों के बाद भी नालों को ढकने की कार्रवाई न होने पर हादसों का ब्योरा जुटाया गया है।
 
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खुले नाले - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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खुले नाले लोगों की जिंदगी छीन रहे हैं। नगर निगम के अफसर एक माह में तीन लोगों की मौत के बाद भी आंखों से पट्टी नहीं हटा सके। ऐसे में शहर के पर्यावरणविद और एक्टिविस्ट ने अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की है। उन्होंने नालों में अब तक गिरकर हुई लोगों की मौत का ब्योरा जुटाया है। वह इस मामले को शीर्ष अदालत या नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में लेकर जाएंगे।
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खुले नालों में गिरकर शीला देवी, गंगा देवी, ओमप्रकाश समेत दो दर्जन से ज्यादा लोग अपनी जिंदगी गंवा चुके हैं। किसी के घर का चिराग छिन गया तो किसी का इकलौता कमाने वाला चला गया। नालों में गिरकर हुई इन मौतों ने एक्टिविस्ट और याचिकाकर्ताओं को झकझोर कर रख दिया है।

लगातार हादसों के बाद भी जब नगर निगम के अधिकारियों ने नालों को ढकने की कोई कार्रवाई नहीं की तो उन्होंने इस मामले में नगर निगम को अदालत के कटघरे में खड़ा करने के लिए अधिवक्ताओं को तथ्य भेजे हैं।
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पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि  खुले नालों को ढकने के लिए हाईकोर्ट समेत कई बार अदालतें नगर निगमों को कह चुकी हैं। बस्तियों के बीच से निकले खुले नाले लोगों की सेहत के साथ जान के लिए भी खतरनाक हैं। इन्हें ढकने और भूमिगत नालों के लिए अदालत का रुख करेंगे।

पर्यावरणविद डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ का कहना है कि आगरा में जितने नाले खुले पड़े हैं उतने किसी अन्य शहर में नहीं हैं। ये बेहद खतरनाक हैं। इनमें औद्योगिक रसायनों, सीवर के साथ चमड़े की कतरन के कारण विषैली गैसें लोगों की सेहत बिगाड़ रही है। मैं अदालत में याचिका के लिए तथ्य जुटा रहा हूं। जल्द ही याचिका दायर होगी।

सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष शिरोमणि सिंह ने बताया कि नालों में गिरकर हो रही मौत किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। नगर आयुक्त और मेयर को तत्काल कार्य योजना बनाकर उस पर काम शुरू करना चाहिए। क्या वह किसी अदालती आदेश का इंतजार कर रहे हैं। अगर ऐसा है तो वह इसके लिए तैयार रहें। 

चार महीने पहले नाला ढकने की हुई थी सिफारिश
नगर निगम के केदार नगर क्षेत्र के पार्षद गुड्डू मेनन ने बताया कि केदार नगर से पृथ्वीनाथ फाटक के बीच पहले ईंटों के भट्ठे थे। इस वजह से यहां 20 से 25 फीट तक गहरे गड्ढे थे। भराव के बाद यहां कॉलोनियां और सड़कों का निर्माण हो गया। जो नाले बने उनका प्रवाह देखा ही नहीं गया और उल्टी दिशा की ओर जोड़ दिए गए। चार महीने पहले नगर निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर और निर्माण विभाग के अवर अभियंता ने नाले की मरम्मत और इसे ढकने की सिफारिश की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश की मौत के तीन दिन बाद भी नगर निगम के किसी अधिकारी ने नाला ढकने की कार्रवाई नहीं की और न ही कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा।
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