उत्तर प्रदेश के आगरा में नगर निकाय चुनाव में समाजवादी पार्टी की मेयर प्रत्याशी जूही प्रकाश की जमानत जब्त हो गई। वहीं निगम के 100 वार्डों में सपा के केवल 3 पार्षद ही जीत सके। ऐसा तब हुआ जब सपा के तीन विधायक पर्यवेक्षक बन कर आए थे। पूरे छह माह तक कवायद चलने के बाद प्रत्याशी चुने गए थे।
सपा को नगर निगम में 39 वार्डों में प्रत्याशी ही नहीं मिले। जिन 61 वार्डों में चुनाव लड़ी उनमें 58 वार्ड में हार गई। महानगर अध्यक्ष वाजिद निसार नगला मेवाती के अपने वार्ड में प्रत्याशी को नहीं जिता सके। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आदेश पर प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने आगरा के लिए छह महीने पहले ही ब्रजेश कठेरिया सहित तीन विधायकों को पर्यवेक्षक बनाया था।
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ये हर महीने बैठक कर जोश भरते रहे। फिर भी नगर निगम के सभी वार्डों के लिए प्रत्याशी नहीं मिले। 61 वार्डों में सपा ने प्रत्याशी उतारे। केवल 3 जीत सके। सपा के इस प्रदर्शन को महानगर व जिला इकाई में गुटबाजी और आपसी रार को वजह माना जा रहा है।
चुनाव से पहले बदला जिलाध्यक्ष
सपा ने चुनाव से पहले अचानक जिलाध्यक्ष बदल दिया। लाल सिंह लोधी की जगह आजाद सिंह जाटव को जिलाध्यक्ष बनाया। उधर, निकाय चुनाव में टिकटों के बंटवारे को लेकर भी पार्टी में रार हुई। चुनाव से पहले कुंवर चंद वकील ने पार्टी छोड़ दी। वह पूर्व में बसपा से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके थे।
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चुनौती की तरह लिया परिणाम
सपा महानगर अध्यक्ष वाजिद निसार क्षेत्रीय चुनाव था। गुटबाजी हावी रही। पार्टी का जो प्रदर्शन रहा है उसकी समीक्षा करेंगे। इस परिणाम को चुनौती की तरह लिया है। संगठन को मजबूत किया जाएगा।