डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के नाम से फिर बीटेक की फर्जी मार्कशीट और डिग्री सामने आई है। जम्मू-कश्मीर से लाभार्थी का पिता इन दस्तावेज का सत्यापन कराने इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी (आईईटी) आया हुआ था। सत्यापन में फर्जी पाए जाने पर निदेशक ने कुलसचिव को इसकी सूचना दी है। मौके पर किसी अधिकारी के न पहुंचने पर निदेशक ने लाभार्थी के परिजन से लिखित में शिकायत प्राप्त की।
बारामूला निवासी मंजूर अहमद डार दोपहर करीब ढाई बजे खंदारी कैंपस स्थित आईईटी पहुंचा। उसने अपने बेटे मोहम्मद सादिक डार की बीटेक मार्कशीट, डिग्री के सत्यापन की मांग की। निदेशक की पड़ताल में सादिक संस्थान का छात्र नहीं पाया गया। पूछताछ में पिता ने निदेशक को बताया कि ये मार्कशीट-डिग्री दिल्ली स्थित नारायण विहार स्थित एजूकेशन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग से मिली है। यह संस्था मुक्त शिक्षा के नाम पर छात्रों का प्रवेश लेती है। आठों सेमेस्टर की मार्कशीट के लिए करीब दो लाख रुपये फीस ली। बताया कि वो ठेकेदारी करता है और बेटा सादिक कुवैत में तेल कंपनी में जॉब करता है। निदेशक डा. वीके सारस्वत ने बताया कि पहले भी कई फर्जी मार्कशीट मिल चुकी हैं, मंगलवार को एक और फर्जी मार्कशीट-डिग्री मिली। युवक के पिता से लिखित में शिकायत पत्र लेकर कुलपति-कुलसचिव को अवगत करा दिया है। कुलसचिव एके अरविंद का कहना है कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है।
70 फीसदी से अधिक नंबर दर्ज
फर्जी मार्कशीट में 70 फीसदी से अधिक नंबर दर्ज हैं। इसमें 600 पूर्णांक में से 424 अंक हैं। मार्कशीट पर विश्वविद्यालय का लोगो और मुहर भी लगी है। अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। मार्कशीट का प्रारूप लगभग वास्तविक मार्कशीट के समान है। डिग्री का प्रारूप भिन्न है।
देशभर में रैकेट, पर कानों पर जूं नहीं
फर्जी मार्कशीट का रैकेट देशभर में फैला हुआ है। बीते साल इसी संस्थान में बीटेक, एमटेक, एमएससी, कंप्यूटर साइंस की 56 से अधिक फर्जी मार्कशीट मिल चुकी हैं। इस बार तो लाभार्थी ने उस संस्थान का नाम, पता और फोन नंबर भी बताए, बावजूद विश्वविद्यालय अधिकारी लापरवाही बनाए हुए हैं। साफ है कि इस पूरे खेल में इनकी मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
अभी तक किसी में भी एफआईआर नहीं
बीए, बीएससी, इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट के अलावा एमबीबीएस तक की फर्जी मार्कशीट पकड़ में आ चुकी हैं। हर बार अधिकारी एफआईआर की बात कहते हैं। लेकिन अभी तक एक भी मामले में पहल नहीं हुई।