अरतौनी में हर्बल उत्पाद की मार्केटिंग करने वाली गिलेज इंडिया ट्रेडिंग कंपनी में कार्यरत 15 कर्मचारियों की विषैला भोजन करने से गुरुवार सुबह हालत बिगड़ गई। इनमें से उड़ीसा निवासी सुरेश मोरमू (26) की एसएन मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि बाकी का उपचार चल रहा है। इन युवकों ने कच्चा केला, बैंगन, आलू की मिक्स सब्जी पकाकर बुधवार रात चावल के साथ खाई थी।
कंपनी में तकरीबन 150 कर्मचारी कार्यरत हैं। ज्यादातर सेल्समैन हैं। इनमें विवेकानंद ने बताया कि वे हर्बल प्रोडक्ट्स को घर-घर जाकर बेचते हैं। रुनकता चौराहे पर गोलू चाचा की बिल्डिंग में 50 कर्मचारी रहते हैं। सभी अपना भोजन मेस में एक साथ पकाते हैं। तीन दिन पहले रुनकता सब्जी मंडी के पास ही काफी संख्या में कच्चे केले पड़े थे। लालच में एक युवक इन केलों को सब्जी में प्रयोग करने के लिए उठाकर ले आया। मंगलवार को भी उन्होंने कच्चे केले-आलू की सब्जी और चावल पकाए थे। बुधवार की रात को मेस में कच्चा केला, बैंगन और आलू की मिक्स सब्जी और चावल पकाए गए। खाना खाने के बाद सभी लोग सोने चले गए। गुरुवार तड़के से युवकों को उल्टी-दस्त शुरू हो गए।
कई की हालत बिगड़ने लगी। पहले तो उन्होंने आसपास के क्लीनिकों में उपचार कराया, लेकिन बाद में डाक्टर ने उन्हें एसएन अस्पताल जाने की सलाह दी। इस पर दोपहर तीन बजे ढहकानाल, उड़ीसा निवासी सुरेश मोरमू (26), उसका भाई श्रीमल मोरमू, विवेकानंद, जुगराज, सीताकांत राम, गोपी पुत्र जुगेंद्र को उनके साथियों ने एसएन मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती कराया। जहां कुछ ही देर बाद सुरेश की मौत हो गई। साथियों ने बताया कि 14 और युवक फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुए हैं, उनका इलाज रुनकता में ही चल रहा है।
कंपनी के अरतौनी स्थित दफ्तर पर ताला लगा मिला। एसएन अस्पताल के डाक्टरों ने बताया कि सभी युवक फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुए हैं। इंस्पेक्टर सिकंदरा हरिमोहन सिंह ने बताया कि उन्हें देर से जानकारी मिली है। मृतक युवक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
सात युवकों को एसएन मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया था, जिनमें से एक की मौत हो गई। छह की हालत में सुधार होने पर उन्हें इमरजेंसी से मेडिसन विभाग में शिफ्ट कर दिया गया। संभवत: उन्होंने बासी या संक्रमित भोजन खाया था।
- डा. अजय अग्रवाल, प्राचार्य, एसएन मेडिकल कालेज