वृंदावन (मथुरा)। धर्म और आस्था की भूमि वृंदावन में दो वृद्धाओं को आश्रय नहीं मिल रहा है। वे चुंगी चौराहे के निकट सड़क किनारे बीमार अवस्था में दिन गुजार रही हैं। उन्हें आश्रम, मंदिर और मठों ने आश्रय नहीं दिया है। यहां तक कि सरकारी आश्रय केंद्र से उन्हें बहार कर दिया गया है।
यहां बड़ी संख्या में संत-महात्मा रहते हैं और देश-दुनिया को मानवता का संदेश देते हैं, लेकिन इसी भूमि पर दो वृद्ध महिलाओं को कोई आश्रय नहीं दे रहा है। कनकधारा फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. लक्ष्मी गौतम ने बताया कि नगर निगम चुंगी चौराहे पर बैठी दो वृद्धाओं की सूचना मिली तो उन्होंने बहुत प्रयास किया कि उन्हें आश्रय मिल जाए, लेकिन उन्हें रखने को कोई तैयार नहीं है।
इसकी सूचना उन्होंने पुलिस को भी दे दी है। वृद्धाओं ने बताया कि वे दिल्ली की रहने वाली हैं और यहां चैतन्य विहार आश्रय सदन में रह रही थीं। बड़ी बहन के बीमार होने के बाद पहले सौ शैय्या अस्पताल और बाद में एक निजी अस्पताल में इलाज कराने के बाद जब दोबारा आश्रय सदन पहुंची तो वहां से नाम काट दिया गया और प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।
डॉ. लक्ष्मी गौतम ने आश्रमों के इस व्यवहार पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने बताया कि ये बीमार माताएं नांगलोई दिल्ली की रहने वाली हैं। इनकी पुत्रवधू से बात हुई तो उसने बताया कि उसकी सास की छोटी बहन ही उसे लेकर गई है। अब वो उसे रखना नहीं चाहते हैं।