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अनियमितताओं में दो ग्राम विकास अधिकारी निलंबित

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मैनपुरी। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों में गड़बड़ी और उच्चाधिकारियों को गुमराह करना दो ग्राम विकास अधिकारियों को महंगा पड़ गया। जांच के बाद दोषी पाए जाने पर जिलाधिकारी के आदेश पर दोनों ग्राम विकास अधिकारियों को डीडीओ ने निलंबित कर दिया। पहला मामला बरनाहल में तैनात ग्राम विकास अधिकारी राजीव राणा का है। उनके पास सजावारपुर, हाजीपुर नेरा, कैलाशपुर, बीनेपुर, बलपुरा, कनिकपुर खिदरपुर, डालूपुर और केशोपुर का कार्यभार था। कुछ दिन पहले ही उनका स्थानांतरण कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने नवीन तैनाती वाले वीडीओ को कार्यभार नहीं दिया।
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मामला जब बढ़ा तो जिलाधिकारी पीके उपाध्याय ने अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए कहा। जिस पर राजीव राणा ने अभिलेख ऑडीटर के पास होने की बात कही। जब ऑडीटर से बात की गई तो उन्होंने इन ग्राम पंचायतों के अभिलेख होने से साफ मना कर दिया। वहीं इन ग्राम पंचायतों में निरीक्षण के दौरान शौचालय और आवास अधूरे मिले। अधिकारियों को गुमराह करने व गलत तरीके से अभिलेखों को अपने पास रखने के मामले में डीएम ने उन्हें निलंबित करने के निर्देश दिए। जिस पर जिला विकास अधिकारी पीके राय ने उन्हें निलंबित कर दिया। मामले में आगे की जांच के लिए खंड विकास अधिकारी घिरोर धीरेंद्र यादव को नामित किया गया है।
वहीं दूसरा मामला गांव देवामई में तैनात वीडीओ ओमशरण का है। यहां चार जुलाई को जिलाधिकारी ने चौपाल लगाकर लोगों की शिकायतें सुनीं थी। जिसमें कुछ लोगों ने बिना विकास कार्य कराए ही धनराशि के गबन का आरोप लगाया था। मामले में परियोजना निदेशक एससी मिश्रा की अध्यक्षता में जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। जांच रिपोर्ट आई तो पता चला कि गांव में कुछ कार्य ऐसे थे जो कराए ही नहीं गए थे, लेकिन उनकी धनराशि निकाली गई थी। जिसमें सड़क पर भराव व एक सीसी रोड निर्माण शामिल था। इन दोनों कार्यों की लागत 2.63 लाख खाते से निकाली गई थी। इस पर घोटाले के आरोप में ग्राम विकास अधिकारी को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया।
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