ग्राम सभा की जमीन पर कब्जे के मामले में सिविल न्यायालय से स्टे निरस्त होने के बाद 31 मामलों में जमीन ग्राम सभाओं के नाम दर्ज कराने के लिए जिला शासकीय अधिवक्ता ने तहसीलदारों को पत्र लिखा है। इन मामलों में कब्जा अवैध पाकर स्टे निरस्त किया गया है।
ग्रामसभा की जमीन पर कब्जा करके स्वामित्व का दावा करने के लिए कब्जाधारक न्यायालय की शरण लेते हैं। न्यायालय से स्टे लेने के बाद जमीन पर निर्माण करते हैं अथवा खेती करना शुरू कर देते हैं। न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण प्रशासन को बेदखली करने में मशक्कत करनी पड़ती है। शासन के निर्देश के बाद चालू वर्ष में न्यायालय से 72 मामलों में चल रहे स्टे शासकीय अधिवक्ता सिविल ने पैरवी करके निरस्त कराए हैं।
इनमें से 31 मामलों में कब्जाधारकों ने स्टे निरस्त होने के बाद कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की है। समय सीमा बीतने के बाद शासकीय अधिवक्ता ने इन मामलों में कब्जे वाली जमीन को विधिक प्रक्रिया अपनाकर ग्रामसभाओं के नाम दर्ज कराने के लिए पत्र लिखा है। तहसीलदारों को लिखे गए पत्र में कानूनी बाधा नहीं होने के कारण संबंधित जमीन को ग्रामसभा के नाम दर्ज कराकर ग्रामसभा की सुपुर्दगी में दिए जाने को कहा गया है।
सरकारी जमीन पर स्टे के मामलों में पैरवी करके स्टे निरस्त कराए जा रहे हैं। तय समय सीमा बीतने के बाद इन जमीनों को ग्रामसभा के नाम दर्ज कराकर ग्रामसभा की सुपुर्दगी में दिए जाने की कार्रवाई होगी। - अजीत नरायन सिंह, शासकीय अधिवक्ता